कसाब ने मुंबई हमलों में भूमिका कबूली (लीड-1)

इन हमलों में 180 लोग मारे गए थे और 300 से ज्यादा घायल हो गए थे।

विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने कहा, "यह सच्चाई की जीत है और विशेष अदालत में अचानक उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।"

निकम ने बताया कि कसाब ने सरकार की ओर से नियुक्त किए गए अपने वकील एस.जी. अब्बास काजमी के साथ चर्चा के बाद यह कदम उठाया है।

कसाब ने यह भी स्वीकार किया कि वह पाकिस्तानी है और उसने अदालत को विस्तार से बताया कि वह और उसके साथी मुंबई के 13 स्थानों को निशाना बनाने के लिए समुद्र के रास्ते कराची से यहां आए थे।

विशेष न्यायाधीश एम.एल. ताहिलयानी के समक्ष अपनी स्वीकारोक्ति में कसाब ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) पर हमले में अपनी भूमिका के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

कसाब ने हमले में अपनी भूमिका कबूलने के साथ ही अदालत में अपने पाकिस्तानी साथियों के नाम भी बताए। उसने बताया कि कराची से रवाना होते समय अबु हमजा, अबु जिंदाल, अबु काफा और जकी-उर-रहमान लखवी उन्हें जहाज तक छोड़ने आए थे।

उसने बताया कि हमजा ने उन्हें आतंकवादी हमलों के बारे में सलाह दी थी। कसाब ने इस बात का भी ब्यौरा दिया कि कैसे उसने एक टैक्सी में बम रखा था, जिसमें बाद में मजगांव में धमाका हो गया था और कैसे 10 लोगों का समूह इस मिशन पर रवाना हुआ था। उन दस में से सिर्फ कसाब ही अकेला जीवित बच सका।

मुंबई हमलों के पीछे लखवी को मास्टरमाइंड करार देते हुए कसाब ने विस्तार से बताया कि कैसे उसने और उसके साथी अबु इस्माइल ने सीएसटी के सार्वजनिक शौचालय में बाद में इस्तेमाल के लिए टाइमर युक्त बम तैयार किया था। इस्माइल पुलिस के हाथों मारा गया था।

उसने बताया कि कराची से मुंबई तक की यात्रा अरब सागर में विभिन्न रास्तों से चार अलग-अलग नौकाओं में पूरी हुई। कसाब और उसके साथी 26 नंवबर को मुंबई पहुंचे और उसके बाद देश के अब तक सबसे जघन्य आतंकवादी हमले को अंजाम दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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