ईयू के नए नियम से भारतीय समुद्री उत्पाद निर्यातक चिंतित

इस प्रमाणपत्र में जिस स्थान से समुद्री खाद्य उत्पादों को पकड़ा गया उसका नाम,पकड़ने का तरीका और जिस ट्रालर का उपयोग किया गया उसके नाम सहित पूरी जानकारी दर्ज होनी चाहिए।

ईयू के नए दिशा निर्देशों का उद्देश्य मछली मारने की अवैध और अनियमित गतिविधियों को रोकना और उन्हें समाप्त करना है। ये नए नियम एक जनवरी 2010 से लागू होंगे और भारतीय समुद्री खाद्य के निर्यातकों को इसके बारे में पिछले अक्टूबर में जानकारी दी गई।

वर्तमान में ईयू को होने वाले निर्यातों के लिए केवल स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और प्रतिबंधित पदार्थो की अनुपस्थिति संबंधी परीक्षण का प्रमाण पत्र आवश्यक है।

निर्यातकों को भय है कि पकड़ प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवश्यक सरकारी तंत्र समय पर गठित नहीं हो पाएगा।

भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातक संघ के अध्यक्ष अनवर हाशिम ने कहा कि वह इस मामले में थाईलैंड और वियतनाम के निर्यातकों के संपर्क में हैं, जो इन नियमों को लागू करने के लिए और अधिक समय की मांग कर रहे हैं। इसके लिए चीन से भी संपर्क करने की योजना है।

उल्लेखनीय है कि ईयू भारतीय समुद्री खाद्य के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। पिछले वित्तीय वर्ष में ईयू को कुल समुद्री खाद्य निर्यात का 25 प्रतिशत हिस्सा गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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