आतंकवाद के खिलाफ पाक प्रतिबद्ध, वार्ता जारी रहे : क्लिंटन (लीड-1)

दिल्ली विश्वविद्यालय के कन्वेंशन हॉल में करीब 1000 छात्रों से क्लिंटन ने कहा, "आतंकवाद और उग्रवाद से निपटना हमारी पहली चुनौती है। इस बात को मैं बहुत निजी तौर पर लेती हूं क्योंकि 2001 में जब हम पर हमला हुआ तो मैं न्यूयार्क में ही थी।"

पिछले कई वर्षो से सार्वजनिक क्षेत्र में मैंने मुख्य रूप से यही काम किया कि हम पर या किसी अन्य पर कोई और हमला टाला जा सके।

पाकिस्तान को 'आतंकवाद का वैश्विक सिंडीकेट' करार देने के एक दिन बाद अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने उसके बारे में अमेरिकी पक्ष दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान के नजरिए में बदलाव आया है।

उन्होंने कहा, "आतंकवाद से मुकाबला करने वालों को हमें कई तरह से समर्थन देना हेागा और पिछले छह महीनों में, मैं यह बात कई दफा दोहरा चुकी हूं कि मैंने आतंकवाद का मुकाबला करने में पाकिस्तान सरकार और जनता की 'वास्तविक प्रतिबद्धता' देखी है।

उन्होंने कहा, "उनके होटलों पर बम बरसाए जा रहे हैं, उनके पुलिसकर्मी मारे जा रहे हैं, उनके लोगों के सिर कलम हो रहे हैं और उनसे गलत व्यवहार हो रहा है।"

दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ बातचीत में क्लिंटन ने कहा, "मैंने आतंकवाद का मुकाबला करने में पाकिस्तान सरकार की ्रप्रतिबद्धता देखी है। आतंकवाद के मुकाबले में जुटे लोगों के समर्थन में हम जो भी कर सकेंगे, करेंगे।"

यात्रा के दौरान क्लिंटन ने बार-बार पाकिस्तान से मुंबई हमलों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है लेकिन साथ ही आतंकवाद से निपटने में उसकी प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया है। इन टिप्पणियों को अमेरिका द्वारा भारत को पाकिस्तान से वार्ता के लिए राजी करने दबी-ढकी कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है।

शत्रुता और विचारधाराओं में मतभेदों के बावजूद दोनों देशों द्वारा बातचीत जारी रखने की जरूरत बताते हुए उन्होंने शीत युद्ध का हवाला दिया। उन्होंने कि शीत युद्ध में दोनों देशों के नेताओं ने कभी भी बातचीत बंद नहीं की थी। उन्होंने कहा, "हमारे नेताओं ने कभी बात करना बंद नहीं किया। वे शिखर बैठकों में गए, हमारे राजनयिकों ने दोनों देशों के परमाणु युद्ध और अन्य घटनाएं टालने के लिए बातचीत जारी रखी।"

उन्होंने कहा, "मेरा यकीन है कि बातचीत से अपने सिद्धांत, अपने मूल्य, अपनी सुरक्षा नहीं त्यागते लेकिन संभवत: बातचीत से प्रगति हासिल की जा सकती है।"

उन्होंने दक्षिण एशिया में लोगों में आपसी संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया। क्लिंटन ने कहा, "मुझे यकीन है कि हम इस क्षेत्र की जनता में मेल-जोल बढ़ाने के नए और रचनात्मक तरीके तलाशेंगे। कुछ संगठनों के जरिए, कुछ कारोबारों के जरिए और कुछ शिक्षा के जरिए। मेरा इसमें पूरा यकीन है और मुझे यह आशावादी लगता है।"

मिस्र के शर्म अल-शेख में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की ओर से जारी संयुक्त वक्तव्य में आतंकवाद से निपटने में खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की गई है लेकिन भारत का कहना है कि समग्र वार्ता बहाली का फैसला भविष्य की घटनाओं पर निर्भर करेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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