रिलायंस गैस विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई टली

बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा पिछले महीने दिए गए फैसले पर रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस विवाद के संबंध में अंतरिम आदेश देने से भी इंकार कर दिया।

अदालत ने इस मामले में विभिन्न पक्षों की ओर से दायर आवेदनों और याचिकाओं को भी अगली सुनवाई में लाए जाने को कहा है। ज्ञात हो कि सरकार ने भी इस मामले में बतौर मध्यस्थ शामिल होने की इच्छा जताई है और इस संबंध में उसकी ओर से शपथ पत्र भी दायर किया गया है।

बम्बई उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में रिलायंस इंडस्ट्रीज को कहा था कि वह रिलायंस नेचुरल को 2.8 करोड़ इकाई गैस 17 वर्षो तक 2. 34 डॉलर प्रति युनिट की दर से आपूर्ति करेगा। इसके अलावा उसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन को 1.2 करोड़ इकाई गैस भी मुहैया करानी पड़ेगी।

रिलायंस नेचुरल की ओर से अदालत में पेश हुए वकील राम जेठमलानी ने कहा, "अदालत ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई तीन न्यायधीशों के साथ करना चाहती है। इसलिए सुनवाई की अगली तारीख 1 सितम्बर तय की गई है। अदालत की ओर से इस मामले में न तो कुछ अवलोकन ही किया गया है और न ही कोई निर्देश दिया गया है।"

गौरतलब है कि गैस आपूर्ति को लेकर अंबानी भाइयों के बीच विवाद चल रहा है। अनिल अंबानी की कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय से विवाद पर सरकार द्वारा पेश शपथ पत्र को खारिज करने का आग्रह किया है। यद्यपि पेट्रोलियम मंत्रालय ने न्यायालय को दोनों भाइयों के बीच हुए समझौते को अमान्य करार देने का सुझाव दिया है।

विवाद के मूल में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और उसकी कीमत है। रिलायंस नेचुरल अपने समूह की ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कृष्णा-गोदावरी बेसिन से इस गैस की आपूर्ति कुछ निश्चित कीमतों पर चाहती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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