पूर्वोत्तर में सूखे की आशंका गहराई
अगरतला/शिलांग, 20 जुलाई (आईएएनएस)। पूर्वोत्तर के राज्यों में इस साल काफी कम वर्षा हुई है और आगे भी मौसम विज्ञानियों को पर्याप्त वर्षा के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। उनका मानना है कि सूखे से इस मौसम की फसलें प्रभावित होने के साथ ही सर्दियों की फसलों पर भी खराब प्रभाव पड़ेगा।
अगरतला स्थित मौसम विभाग के निदेशक दिलीप साहा ने बताया कि इस मानसून सत्र में असम और मेघालय में औसत से 50 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वहीं त्रिपुरा,मिजोरम,मणिपुर,नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में औसत से 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
साहा ने आईएएनएस को बताया इस समय वह यह अनुमान लगाने में अक्षम हैं कि मानसून के शेष समय सामान्य वर्षा होगी या नहीं।
असम सरकार ने पिछले सप्ताह प्रदेश के 27 में से 14 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। सरकार ने कहा कि कम मानसूनी वर्षा के कारण कृषि बुरी तरह प्रभावित हुई है।
पिछले महीने ही मणिपुर सरकार ने पूरे राज्य को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया था।
नागालैंड में भी औसत से 37.15 प्रतिशत कम वर्षा के कारण सूखे जैसी स्थिति घोषित कर दी गई है। कम वर्षा से धान और अन्य फसलें काफी प्रभावित हुई हैं।
शिलांग में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के एक अधिकारी ने कहा कि पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्सों में कृषि मानसून पर अधारित है और कुल कृषि क्षेत्रफल के केवल 40 प्रतिशत हिस्से के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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