संस्कृत हमारी प्राचीनतम धरोहर है : ठाकुर

राज्यपाल शनिवार को यहां राजस्थान विश्वविद्यालय में अन्तरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन और पंडित बद्री प्रसाद महर्षि संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन संस्थान के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संस्थान के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। यह समारोह राजस्थान विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग और नई दिल्ली के राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

राज्यपाल ने कहा कि इस सम्मेलन में संस्कृत के बहुआयामी चिन्तन से विकास की नई संभावनाएं तलाशी जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह मंथन सम्पूर्ण मानव समाज के लिए उपयोगी सिद्घ होगा।

मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत भाषा हमारी अमूल्य धरोहर होने के साथ ज्ञान-विज्ञान के विषयों का आधार रही है और इसमें भारत की आध्यात्मिक चेतना समायी हुई है। इसी कारण विद्वानों ने इसे देववाणी कहा है। उन्होंने कहा कि इस भाषा के श्लोकों, सूत्रों और सूक्तियों में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों का संदेश निहित है।

मुख्यमंत्री ने राजस्थान के वीरता, त्याग और बलिदान के गौरवपूर्ण इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि ज्ञान के क्षेत्र में भी यह सदैव आगे रहा है। उन्होंने प्रदेश में संस्कृत भाषा के क्षेत्र में ज्ञान का अलख जगाने वाले विद्वानों को नमन करते हुए कहा कि वेद विज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन, साहित्य, वास्तु, योग आदि विषयों पर महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना कर उन्होंने देश और समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है।

गहलोत ने कहा कि प्रदेश में संस्कृत विद्या की विरासत को अक्षणुण रखने और भाषा के विकास के लिये राज्य सरकार संकल्पबद्घ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके पिछले कार्यकाल में जयपुर में पहली बार जगद्गुरू रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी और इस विश्वविद्यालय के बन जाने से संस्कृत भाषा में उच्च शिक्षा और अनुसंधान को गति मिली है।

गहलोत ने कहा कि देश और दुनिया का मार्ग दर्शन करने में विद्वानों के योगदान को रेखांकित करते हुए आशा जताई कि इस सम्मेलन में भाग ले रहे विद्वान संस्कृत साहित्य में छिपे ज्ञान को प्रकाशमान करेंगे। उन्होंने संस्थान के नए भवन को बनाने के लिए पं. बद्रीप्रसाद महर्षि के परिवारजनों और ट्रस्ट के सदस्यों को साधुवाद देते हुए कामना की कि यह संस्कृत भाषा के अध्ययन तथा अनुसंधान के लिये महत्वपूर्ण केन्द्र बने।

कार्यक्रम को केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री सी.पी. जोशी ने भी सम्बोधित किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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