भारत-पाक मिलकर निपटेंगे आतंकवाद से

Manmohan Singh, Yousuf Raza Gilani
शर्म अल-शेख (मिस्र)। भारत और पाकिस्‍तान ने फैसला किया है कि दोनों देश मिलकर आतंकवाद से निपटेंगे। मुंबई हमले के आठ माह बाद भारत और पाकिस्तान गुरुवार को ठप पड़ी शांति वार्ता प्रक्रिया को फिर से बहाल करने पर सहमत हो गए हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट रूप से जोर दिया है कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर आतंकी गतिविधियों को खत्म करना होगा।

गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने गुरुवार को मिस्र के शर्म अल-शेख में करीब दो घंटे बैठक की।

और कोई चारा नहीं

बैठक के बाद मनमोहन सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में एक सवाल के जवाब में कहा, "देखिए बातचीत के सिवाए कोई चारा नहीं है।" साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुंबई हमले की तरह अगर फिर कोई वारदात हुई तो बातचीत प्रभावित होगी। सिंह ने कहा, "मैंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से कहा कि मुंबई जैसा हमला भविष्य में नहीं होना चाहिए।"

सिंह ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव बैठक करेंगे, जिसमें भविष्य में वार्ता की प्रकृति पर चर्चा होगी और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि भारत की मुख्य चिंता सीमापार आतंकवाद को ध्यान में रखकर वर्तमान समग्र वार्ता के प्रारूप में बदलाव किया जा सकता है। वार्ता के वर्तमान प्रारूप में जम्मू एवं कश्मीर और सुरक्षा के साथ ही आठ द्विपक्षीय मसले शामिल हैं।

मुंबई हमले का मुद्दा छाया रहा

मुंबई हमलों के करीब आठ माह बाद भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को समग्र वार्ता प्रक्रिया की बहाली पर सहमति जताई। दोनों देशों के नेता वार्ता प्रक्रिया को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई से अलग रखने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं के बीच बैठक में आतंकवाद मुख्य मुद्दा रहा। नवंबर में हुए मुंबई पर आतंकी हमले की वजह से दोनों पड़ोसी देशों के बीच समग्र वार्ता प्रक्रिया बाधित है।

यहां जारी संयुक्त बयान में बातचीत का खाका खींचते हुए कहा गया कि जब भी जरूरी हो, दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक होनी चाहिए। दोनों देशों के विदेश मंत्री सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान मिलेंगे।

इसका मतलब यह है कि समग्र वार्ता प्रक्रिया बहाली के मुद्दे पर अब दो महीने बाद ही कोई फैसला हो सकेगा और यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि भारत की चिंताओं के मद्देनजर पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई करता है। बयान में कहा गया कि मनमोहन सिंह और यूसुफ रजा गिलानी ने गुरुवार को इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद दोनों देशों के लिए मुख्य चुनौती है। बयान में कहा गया कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए दोनों देश प्रतिबद्ध हैं और इस संदर्भ में एक दूसरे की मदद करेंगे।

गिलानी ने भरोसा दिलाया

गिलानी के साथ बैठक के दौरान मनमोहन सिंह ने एक बार फिर कहा कि मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के कटघरे तक लाने की जरूरत है। बयान के अनुसार गिलानी ने भरोसा दिलाया है कि पाकिस्तान इस संबंध में हरसंभव कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने मुंबई हमले के संबंध में अब तक की गई जांच के दस्तावेज मुहैया कराए हैं और उसे इस संबंध में अतिरिक्त सूचना और साक्ष्य का इंतजार है।

प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि पाकिस्तान से मिले दस्तावेज की समीक्षा की जाएगी। दोनों नेताओं ने इस पर सहमति जताई कि दोनों देश भविष्य में आतंकी हमलों के संबंध में तात्कालिक, विश्वसनीय और कार्रवाईपरक सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे। मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ सभी बकाया मसलों सहित सभी मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि पाकिस्तान स्थिर और लोकतांत्रिक देश के रूप में सामने आए। दोनों नेताओं ने इस पर सहमति जताई कि क्षेत्र में गरीबी दूर करना और विकास मुख्य चुनौती है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के प्रति भी प्रतिबद्धता जताई।

सईद के खिलाफ सबूत जुटा रहा भारत

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई के लिए सर्वसम्मत राय बनाने में जुटा है। मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने गिलानी के समक्ष सईद का मसला उठाया। उल्लेखनीय है कि सईद लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा संस्थापक है।

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा कि सईद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सर्वसम्मत राय कायम की जाएगी। पंजाब प्रांत में सरकार चला रही विपक्षी पार्टी पर इस संबंध में दबाव डाला जाएगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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