अरबों रुपये बहाने के बावजूद मैली हैं गंगा-यमुना : रमेश

रमेश के मुताबिक तमाम प्रयासों के बावजूद पिछले 20 साल की तुलना में इन दो नदियों का पानी काफी मैला हो गया है।

रमेश ने यह भी कहा कि शहरीकरण और औद्योगिकरण के कारण पिछले कुछ वर्षो में देश की प्रमुख नदियों में प्रदूषित पदार्थ गिरने की मात्रा काफी बढ़ गई है।

पर्यावरण और वन मंत्री ने लोकसभा में यह बात भारतीय जनता पार्टी के योगी आदित्यनाथ द्वारा एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए नदियों और झीलों की सफाई के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछे जाने पर कही।

रमेश ने कहा, "मैं स्वीकार करता हूं कि पिछले 20 साल में गंगा और यमुना के पानी को साफ करने के जितने भी प्रयास हुए हैं, सब बेकार गए हैं।"

पर्यावरण और वन मंत्री ने कहा कि दो चरणों में गंगा की सफाई के लिए अब तक 816 करोड़ रुपये बहाए जा चुके हैं। इसी तरह यमुना में गंदा पानी गिरने से रोकने के लिए सरकार ने सीवरेज प्रणाली तैयार करने पर अब तक दो चरणों में 870 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

रमेश ने कहा कि प्रमुख नदियों की सफाई के लिए जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं उनमें शहरी नियोजन संस्थाओं का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। रमेश के मुताबिक सरकार अगले पांच साल तक देश भर के सीवेज प्लांटों के रखरखाव का खर्च उठाने को तैयार है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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