बलूचिस्तान मसले पर भारत का रिकार्ड खुली किताब की तरह : प्रधानमंत्री
मिस्र के शर्म अल-शेख शहर में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन के दौरान गुरुवार को दोनों नेताओं के बीच घंटा भर चली बातचीत में प्रधानमंत्री ने आतंकवादी तत्वों को पाकिस्तान की ओर से मिलने वाली सहायता, बढ़ावा और प्रेरणा का मसला उठाया।
बदले में गिलानी ने अफगानिस्तान की सीमा से सटे अशांत बलूचिस्तान सूबे में भारत की कथित सक्रियता की बात उठाई।
मनमोहन सिंह ने गिलानी के साथ बातचीत के बाद संवाददाताओं को बताया "उन्होंने कहा कि उनके देश के लोग कहते हैं कि भारत बलूचिस्तान में सक्रिय है और मैंने कहा कि बलूचिस्तान को लेकर हमारा आचरण खुली किताब की तरह है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "हम हर मसले पर चर्चा को तैयार हैं क्योंकि हमने कुछ भी गलत नहीं किया है। ..और मैंने उनसे यह भी कहा कि मुझे कई बार बताया गया है कि अफगानिस्तान में भारत का वाणिज्य दूतावास अवांछित गतिविधियों में लिप्त है।"
उन्होंने कहा कि इन दूतावासों की स्थापना 1950 के दशक में हुई थी ।
प्रधानमंत्री ने कहा, "लेकिन अगर आपके पास कोई सबूत हैं तो हम उसकी पड़ताल करने को तैयार हैं क्योंकि हम एक खुाली किताब की तरह हैं और हमारे पास छुपाने को कुछ भी नहीं। हम किसी भी मसले पर चर्चा करने से घबरा नहीं रहे हैं।"
बलूचिस्तान के मसले का जिक्र दोनों नेताओं की बैठक के बाद जारी साझा बयान में भी किया गया। यह पहला मौका है जब बलूचिस्तान का उल्लेख दोनों देशों के किसी भी साझा घोषणापत्र में किया गया है। एक पृष्ठ के इस दस्तावेज में कहीं भी कश्मीर का उल्लेख नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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