कथित कौमार्य परीक्षण का मामला पुलिस तक पहुंचा

मालूम हो कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह से पहले 151 युवतियों का कथित तौर पर कौमार्य परीक्षण कराया गया था जिसमें 14 युवतियां गर्भवती निकली थी, जिनकी बाद में प्रशासन ने शादी रोक दी थी। गुरूवार को एक पीड़ित युवती ने आदिम जाति कल्याण थाने में लिखित में एक शिकायत देकर कहा है कि विवाह समारोह में उसके नाजुक अंगों (गुप्तांगों) की शादी से पहले चिकित्सकों ने जांच की थी।

शहडोल के पुलिस अधीक्षक लखनलाल अहिरवार ने आईएएनएस को बताया है कि अनुसूचित जनजाति की इस युवती ने लिखित में शिकायत देकर जिला कलेक्टर, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर मामला दर्ज करने की मांग की है। अहिरवार के मुताबिक महिला द्वारा दिए गए आवेदन की पुलिस जांच कर रही है।

यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस महिला ने आदिम जाति कल्याण थाने में लिखित में शिकायत दी है उसका नाम बताने से थाने के प्रभारी उप पुलिस अधीक्षक पी़ क़े नागोतिया लगातार कतरा रहे हैं। वह महिला के नाम का खुलासा करना उचित नहीं समझते।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में युवतियों का कथित तौर पर कौमार्य परीक्षण कराए जाने के मामले के तूल पकड़ने पर मध्य प्रदेश में सड़क से लेकर विधानसभा तक में हंगामा हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा स्थानीय शासन मंत्री बाबूलाल गौर भी शहडोल के विवाह समारोह में किसी भी युवती का कौमार्य परीक्षण कराए जाने के आरोपों को नकार चुके है। अब एक युवती द्वारा समारोह में शादी से पहले कौमार्य परीक्षण कराए जाने की शिकायत से शहडोल प्रशासन से लेकर सरकार तक मुश्किल में आ गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय महिला आयोग का दल भी शुक्रवार को शहडोल पहुंच रहा है। यह दल उन युवतियों से सीधे संपर्क करेगा जिनकी विवादित सामूहिक विवाह समारोह में शादी हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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