मध्य प्रदेश में अब सिर्फ 30 मिनट में मिलेगी आपातकालीन चिकित्सा

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को इस योजना की शुरूआत करते हुए भोपाल जिले के लिए 12 एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि मध्य प्रदेश जैसे बड़े और विशाल राज्य में आम आदमी तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस चुनौती को प्रदेश सरकार ने अपनी सात प्राथमिकताओं में शामिल किया है। पिछले पांच सालों में विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में शैयाओं (बिस्तर) की संख्या नौ हजार से बढ़ाकर 14 हजार की है। इतना ही नहीं दीनदयाल अन्त्योदय उपचार योजना के साथ ही राज्य बीमारी सहायता निधि के माध्यम से गरीबों को उपचार सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज शुरू हुई इस आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन सेवा का धीरे धीरे प्रदेश के सभी जिलों में विस्तार किया जाएगा। इस सेवा से सडक दुर्घटना, अग्नि दुर्घटना, मेडिकल ट्रामा, हृदय रोगी, प्रसवकालीन आकस्मिक परिस्थितियों से आसानी से निपटा जा सकेगा और मानव जीवन हानि को बचाया जा सकेगा।

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा ने कहा कि यह सेवा जीवीके ईएमआरआई के तकनीकी सहयोग से बिना नफा-नुकसान के शुरू की गई है। इसके लिए कॉल सेन्टर होगा जहां सूचना देने पर महज 18 से 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस पहुंच जाएगी। प्रदेश में पहले पांच शहरों भोपाल के अलावा इन्दौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में उपलब्ध कराई जा रही है। बाद में इस सेवा का विस्तार चिकित्सा महाविद्यालय वाले जिलों के निकटवर्ती जिलों में होगा। वर्ष 2009 - 10 में 100 एम्बुलेंस चयनित जिलों में संचालित की जाएगी। इन एम्बुलेंस में चालक और आपातकालीन पैरामेडिकल तकनीशियन मौजूद रहेंगे जो प्रभावित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार मुहैया करा सके। यह एम्बुलेंस जीवन रक्षक उपकरण, औषधियों और सामग्री से सुसज्जित रहेंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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