गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने रखा आतंकवाद पर सम्मेलन का प्रस्ताव (लीड-1)
शर्म अल-शेख, 15 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नैम) को वर्तमान के लिए ज्यादा प्रासंगिक बताते हुए आतंकवाद और उसे पनाह देने वालों को कटघरे में खड़ा करने पर जोर देते हुए यहां चल रहे नैम के 15वें सम्मेलन के पहले दिन अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर एक विस्तृत सम्मेलन बुलाने का प्रस्ताव रखा।
सम्मेलन में आए 118 देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षो में आतंकवादी समूह ज्यादा ताकतवर, ज्यादा संगठित और ज्यादा साहसी हो गए हैं।
उन्होंने कहा, "आतंकवादियों और उन्हें संरक्षण व धन मुहैया कराने वालों को निश्चित रूप से न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। आतंकवादियोंकी जड़ों व ठिकानों को निश्चित तौर पर खत्म किया जाना चाहिए और उनके लिए कोई सुरक्षित रास्ता नहीं छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि वे किसी समूह या धर्म के नहीं होते। यह समय अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के मुद्दे पर एक व्यापक सम्मेलन के लिए सहमत होने का है।"
सम्मेलन में देशों को आतंकवाद की एक सर्वमान्य परिभाषा को स्वीकार करना पड़ेगा और सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए नियम कायदे बनाने होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्तीय संकट, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और संयुक्त राष्ट्र में सुधार सहित अन्य वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए यह एकजुटता जरूरी है।
यहां 15वें गुटनिरपेक्ष सम्मेलन के पहले दिन मनमोहन सिंह ने कहा, "इतिहास ने साबित किया है कि गुटनिरपेक्ष एक विचार है जो आगे ही बढ़ता जाता है न कि वह मद्धिम पड़ता है। हमें इसे निश्चित रूप से आगे ले जाना चाहिए और इसका इस्तेमाल आज की चुनौतियों से निपटने के लिए होना चाहिए।" सम्मेलन में विकासशील देशों के 118 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 1961 में पहले गुट निरपेक्ष सम्मेलन में दिए भाषण को दोहराते हुए उन्होंने कहा, "यहां राष्ट्रों की जो शक्ति इकट्ठा हुई है वह सैन्य या आर्थिक शक्ति नहीं है, लेकिन यह शक्ति है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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