मध्य प्रदेश में 46 हजार जल स्त्रोत सूखे
भोपाल, 14 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में जल संकट गंभीर रूप ले चुका है क्योंकि यहां भू जल स्तर 11 मीटर नीचे तक चला गया है। हाल यह है कि प्रदेश के 46,689 जल स्त्रोत सूख गए हैं। सबसे ज्यादा जल स्तर 11़ 50 मीटर शाजापुर में नीचे गया है जबकि 3662 जल स्त्रोत इंदौर में सूखे हैं।
बीते वर्ष प्रदेश में हुई कम वर्षा का असर अभी तक नजर आ रहा है। देश के अन्य हिस्सों में भले ही मानसून दस्तक दे चुका हो मगर मध्य प्रदेश में अभी भी पानी को लेकर मारामारी जारी है। हाल यह है कि पानी की खातिर लोग खून बहाने तक को तैयार हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 46,689 जल स्त्रोत सूख चुके हैं। इनमें 46094 हैंडपंप और 595 लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कुएं भी शामिल हैं।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गौरी शंकर बिसेन द्वारा मंगलवार को विधानसभा में दी गई जानकारी में बताया गया है कि भिंड जिले को छोड़कर प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां जल स्त्रोत न सूखे हों। प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर का जल स्त्रोत सूखने के मामले में सबसे बुरा हाल है जहां 3662 हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। इसी तरह उज्जैन में 3113, रतलाम में 3091, देवास में 3038 जल स्त्रोत सूख गए हैं।
केंद्रीय जल संसाधन विभाग के भू जल बोर्ड द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के आधार पर बिसेन ने बताया कि प्रदेश में टीकमगढ़ को छोड़कर हर जिले में भू जल स्तर नीचे चला गया है और भिंड के अलावा सभी जिलों में जल स्त्रोत सूखे हैं। बिसेन ने भू जल स्तर में गिरावट की मुख्य वजह अल्प वर्षा बताई है। उन्होंने कहा है कि पेयजल योजना स्त्रोतों की रीचाजिर्ंग के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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