कूनों अभ्यारण्य में नहीं आएंगे गुजरात से शेर
प्रदेश के कूनों अभयारण्य को एशियाई शेरों से गुलजार करने के लिए वर्ष 1996-97 में सिंह परियोजना बनाई थी। इस योजना के मुताबिक गुजरात के गिर अभयारण्य से छह से आठ एशियाई शेरों को लाया जाना प्रस्तावित था। पिछले 13 सालों में इस परियोजना के तहत लगभग 17 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च की जा चुकी है। कुल 64 करोड़ की लागत वाली इस योजना को वर्ष 2015 में पूरा होना था मगर गुजरात सरकार के शेर देने से मना करने पर इस योजना पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रदेश के वन राज्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कांग्रेस विधायक महेन्द्र सिंह के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि गुजरात सरकार द्वारा कूनों अभयारण्य के लिए शेर देने से इंकार कर दिया है। गुजरात के इस इंकार के बाद यह योजना कब पूरी होगी इस समय सीमा का वन मंत्री खुलासा नहीं करते।
उन्होंने बताया कि एशियाई शेर वर्तमान में सिर्फ गिर अभयारण्य में पाए जाते हैं। डर इस बात का है कि किसी महामारी अथवा प्राकृतिक विपत्ति से यह प्रजाति विलुप्त हो सकती है। इसलिए इन शेरों को दूसरे स्थान पर भी भेजने का निर्णय लिया गया था। केंद्र सरकार द्वारा इस प्रजाति को बचाए रखने के मकसद से कूनों अभयारण्य को उपयुक्त पाए जाने पर ही यह योजना क्रियान्वित की जा रही थी। इस योजना के मुताबिक छह से आठ शेर यहां लाए जाना प्रस्तावित थे। मगर गुजरात सरकार द्वारा शेरों को देने से मना करने और प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित होने के कारण इस योजना के पूरा होने की समय सीमा तय नहीं की जा सकती।
वन राज्य मंत्री ने आगे बताया कि अब वन विभाग कूनों अभयारण्य में चिड़ियाघर के सिंहों के शावक छोड़ने की योजना बना रहा है।
इस योजना के तहत कूनों अभयारण के अंदर स्थित 24 राजस्व गांव के परिवारों को अन्यत्र बसाया जा चुका है और सरकार दो करोड़ 92 लाख से अधिक का विस्थापितों को मुआवजा वितरित करने के अलावा पुनर्वास पर 14 करोड़ 53 लाख रुपए व्यय कर चुकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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