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जी-8 प्रतिबंध से भारत और फ्रांस के परमाणु व्यापार पर बेअसर (लीड-1)

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पेरिस, 14 जुलाई (आईएएनएस)। परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी)पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों को संवर्धन और पुर्नससाधन प्रौद्योगिकियों (ईएनआर) के हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाने संबंधी जी-8 देशों के घोषणा पत्र का भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह बात मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के बीच बैठक से पहले यहां भारतीय अधिकारियों ने कही।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा, "हमें कहीं से भी कोई मदद नहीं मिल रही।" उन्होंने कहा कि इस फैसले का भारत पर कोई व्यावहारिक असर नहीं होगा जो लंबे अर्से से पुर्नससाधन करता आ रहा है।

सिंह और सरकोजी की बैठक में अन्य द्विपक्षीय मसलों के अलावा दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।

फ्रांस 45 सदस्यों वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के संगठन (एनएसजी)का सदस्य होने के साथ-साथ जी-8 का पहला ऐसा सदस्य है जिसने पिछले साल 30 सितंबर को भारत के साथ परमाणु कारोबार पर लगी रोक के हटते ही सबसे पहले उसके साथ द्विपक्षीय असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर दस्तखत किए थे।

फ्रांसीसी कंपनी अरेवा के साथ करार अंतिम चरण में है। फ्रांसीसी कंपनी महाराष्ट्र के जैतपुर में 1650 मेगावाट क्षमता वाले दो अत्याधुनिक रिएक्टर तैयार करने के लिए भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड(एनपीसीआईएल) के साथ बातचीत कर रही है। अरेवा के प्रतिनिधियों और एनपीसीआईएल अधिकारियों के बीच बातचीत के कई दौर संपन्न हो चुके हैं।

भारत एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों को ईएनआर प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण पर रोक लगाने के जी-आठ के कदम से हैरान है। इसे भारत के खिलाफ लक्ष्य करके उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि भारत को विशेषकर फ्रांस के बारे में चिंता की जरूरत नहीं है। फ्रांस के साथ द्विपक्षीय परमाणु करार भारत से फ्रांस के परमाणु ईंधन को स्वयं परुससाधित करने का अवसर मिलेगा। फ्रांस ने पेशकश की है कि यदि भारत चाहे तो वह उसके लिए यह काम कर सकता है। समझा जाता है कि रूस ने भी अपने द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले ईंधन का भारत द्वारा पुर्नससाधन किए जाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अलावा भारत के पास स्वयं की ईएन आर प्रौद्योगिकी है, ऐसे में जी-आठ के प्रतिबंध का उस पर कुछ खास असर नहीं पड़ेगा।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को संसद में कहा था कि भारत को जी-आठ के इस रुख से चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि उसे आईएईए और एनएसजी से छूट मिल चुकी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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