कथित कौमार्य परीक्षण पर मध्य प्रदेश विधानसभा में हंगामा
शहडोल में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह से पहले 151 लड़कियों का कथित कौमार्य परीक्षण कराया गया था, जिसमें 14 लडकियां गर्भवती पाई गईं थी। कांग्रेस ने इसे असंवैधानिक और महिलाओं का अपमान करार देते हुए विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के जरिए मंगलवार को चर्चा कराए जाने की मांग की।
विधानसभा में कौमार्य परीक्षण का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के उपनेता चौधरी राकेश सिंह ने कहा कि यह गंभीर मसला है और इस घटना ने पूरी सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसपर भाजपा के विधायक भड़क उठे और उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद कांग्रेस के विधायकों ने आसन्न के करीब पहुंचकर नारेबाजी की। विधायकों के आचरण पर विधानसभा अध्यक्ष ने आपत्ति जताई। इस बीच दोनों ओर से नारेबाजी का दौर शुरू हो गया जिससे सदन में हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने राकेश सिंह को अपनी बात रखने का अवसर दिया, जिसमें उन्होंने इस लोक महत्व के मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि वे किसी न किसी रूप में इस मुद्दे पर सदन में चर्चा जरूर कराएंगे। साथ ही उन्होंने चर्चा से पहले कांग्रेस के निष्कर्ष तक पहुंचने अर्थात कौमार्य परीक्षण की बात को उचित नहीं माना।
वहीं सरकार का पक्ष रखते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर जनजातीय समुदाय में भ्रान्ति फैलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि शहडोल में किसी भी लड़की का कौमार्य परीक्षण नहीं कराया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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