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अमेरिका में बटेंगी कुरान की प्रतियां

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Us Muslims

अमरीका में रहने वाले मुसलमानों ने आजकल इस्लाम धर्म और मुसलमानों के बारे में देश के लोगों में जानकारी बढ़ाने और ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए एक नया तरीक़ा अपनाया है. अमरीकी लोगों को इस्लाम धर्म और मुसलमानों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अब सीधे तौर पर इस्लामी स्रोत या पवित्र क़ुरान का सहारा लिया जा रहा है.

11 सितंबर के हमलों के बाद से बहुत से अमरीकी लोगों में मुसलमानों और इस्लाम के बारे में जानकारी कम होने से कुछ ग़लतफ़हमियाँ पैदा हुई हैं और अमरीका में रहने वाले मुसलमानों ने लगातार इस ओर कोशिश की है कि वह आम अमरीकियों की इस्लाम और मुसलमानों के बारे में जानकारी बढ़ाएं. इसी सिलसिले में अब इस नए अभियान के तहत एक अमरीकी मुस्लिम संस्था काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस या केयर ने देश भर में नेताओं और सरकार में शामिल लोगों को इस्लाम की धार्मिक पुस्तक क़ुरान की प्रतियां भेंट करने का फ़ैसला किया है.

मस्जिदें, मदरसे भी अभियान में शामिल 

इस अभियान में अमरीका भर के कई शहरों में स्थित मस्जिदों और मदरसों को भी शामिल किया जा रहा है. इस कार्यक्रम के अनुसार इस साल के अंत तक क़रीब एक लाख क़ुरान की प्रतियाँ अमरीकी नेताओं और सरकारी अधिकारियों में बांटी जाएंगी.

अभियान शुरू करने वाली संस्था केयर के निदेशक नेहाद आवाद का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा के अपने भाषणों में कई बार क़ुरान का हवाला दिए जाने के बाद उनकी संस्था को विचार आया कि क्यों न अमरीकी नेताओं और सरकारी नीतिकारों की भी क़ुरान के बारे में जानकारी बढ़ाई जाए जिससे उन्हें मुसलमानों और उनके धर्म को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी.

नेहाद आवाद का कहना है,“राष्ट्रपति ओबामा का भाषण इस मायने में एतिहासिक था कि वह अमरीका और विश्व भर के मुसलमानों के साथ एक नए दौर की शुरुआत करना चाहते हैं. हमारा यह विचार है कि इस ओर बढ़ने के लिए जो क़दम उठाए जाएँ, उनमें सबसे पहले अमरीकी लोगों में इस्लाम और मुसलमानों के बारे में जानकारी बढ़ाया जाना सबसे आवश्यक है."

ओबामा के भाषण का उल्लेख

पिछले महीने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मिस्र की राजधानी काहिरा में विश्व भर के मुसलमानों को संबोधित करके जो भाषण दिया था, उसमें भी कई बार क़ुरान का हवाला दिया था. अपने भाषण में उन्होंने ख़ासकर क़ुरान की उन आयतों का ज़िक्र किया था जिसमें सच बोलने की हिदायत की गई है, इंसानी जान को बेशक़ीमती बताया गया है और दुनियाभर के लोगों में मौजूद विविधता का आदर करने की बात कही गई है.

इस अभियान में बांटी जाने वाली क़ुरान की प्रतियों को ख़ास तौर पर छपवाया गया है. इसमें कुल 1150 पन्ने हैं और एक प्रति की लागत है 78 डॉलर या क़रीब 4 हज़ार रूपए. लेकिन अमरीकी नेताओं को यह प्रतियाँ मुफ़्त भेंट की जाएंगी. आम लोगों को इसके लिए सिर्फ़ 9 डॉलर या क़रीब 500 रूपए डाक से भेजने होंगे. इस अभियान में केयर ने अमरीकी मुसलमानों से अपील की है कि वो ख़ुद 45 डॉलर में क़ुरान की इन प्रतियों को ख़रीद कर अपने शहर और राज्य के स्तर पर भी नेताओं को भेंट करें.

नामों की लॉटरी

जिन अमरीकी नेताओं को मुफ़्त क़ुरान भेंट की जानी है, उनमें अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, अमरीकी उपराष्ट्रपति जोसेफ़ बाइडन और अमरीकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पेलोसी भी शामिल हैं. बराक ओबामा, जोसेफ़ बाइडन और नैन्सी पेलोसी को भेंट की जाने वाली प्रतियों को चुनने के लिए उन अमरीकियों के नाम की लॉटरी निकाली गई जिन्होनें इस अभियान के तहत क़ुरान की प्रतियों को प्रायोजित किया.

फ़िलेडेल्फ़िया के रफ़ी पुनेकर को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को क़ुरान भेंट करने के लिए चुना गया है. अमरीका के उपराष्ट्रपति जोसेफ़ बाइडन को क़ुरान भेंट करने के लिए नॉर्थ केरोलाइना की एक महिला डार्लिन मे को चुना गया है. जबकि नईमा सलीम नामक मेरीलैंड की एक प्रायोजक महिला को अमरीकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पेलोसी को क़ुरान भेट करने के लिए चुना गया है.

लेकिन क़ुरान की प्रतियाँ बांटने का यह अभियान यहीं नहीं रूकेगा. इसी अभियान के तहत केयर की अगले दस सालों में 10 लाख क़ुरान की प्रतियाँ आम अमरीकियों में भी बांटने की योजना है. इस तरह यह अभियान अमरीका के इतिहास में इस्लाम के बारे में आम लोगों के बीच जानकारी बढ़ाने के मक़सद से शुरू किया जाने वाला सबसे बड़ा अभियान कहा जा रहा है. ख़ास तौर पर छापी गई क़ुरान की इन प्रतियों में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भाषणों में प्रयोग की गई कुरानी आयतों को रेखांकित किया गया है.

इन प्रतियों में ख़ासकर ऐसी आयतों और अध्यायों को भी प्रमुखता दी गई है जिनमें महिलाओं के अधिकारों, सामाजिक न्याय और दूसरे धर्मों का आदर करने की भी बात कही गई है. इसके अलावा ऐसी आयतों को भी रेखांकित किया गया है जिनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच भाईचारा बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा सके.

इस अभियान में क़ुरान की जिन प्रतियों का वितरण किया जा रहा है उनमें अरबी भाषा के साथ-साथ अंग्रेज़ी भाषा में उसका अनुवाद भी छपा है. इसके अलावा अरबी भाषा को रोमन इंग्लिश में भी लिखा गया है और अलग-अलग आयतों और अध्यायों के बारे में ख़ास तौर पर टिप्पणियाँ भी लिखी गई हैं.

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