भारत पर चीनी हमले की आशंका

गौरतलब है चीन ने 1962 में भारत के साथ हुए युद्ध के दौरान जम्मू कश्मीर में 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था, वहीं पाकिस्तान ने 1963 में एकपक्षीय तरीके से 5120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र एक करार के तहत चीन को सौंपा, जिस पर उसने 1947-48 में कब्जा किया था।
भारत-अमेरिका के रिश्तों से परेशान
हालांकि वार्षिक रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास चीनी सेना की स्थिति का जिक्र नहीं किया गया है। बीजिंग यहां के करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपना बताता है और उसने 30 सैन्य डिवीजनों को तैनात कर रखा है जो एलएसी के आसपास लगातार हमलों में संलिप्त हैं।
चीन, अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा की अफगान-पाक नीति (जो मूलत: पाक-अफगान नीति है) से भी परेशान है। पाकिस्तान, पेइचिंग के साथ अपनी निकटता से पहले ही हिला हुआ है, जो सही मायने में गृहयुद्ध में फंसा हुआ है और भारत के खिलाफ अहमियत खो रहा है।
रिपोर्ट के उनुसार कहा कि सबसे खास बात यह है कि अमेरिका और पश्चिम के साथ भारत के बढ़ते तालमेल से चीन चिंतित है। ऐसे में चीनी कम्युनिस्टों की सभी चिंताएं शांतिवादी भारत के खिलाफ युद्ध से ही हल होती है ताकि बहुआयामी रणनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति की जा सके।
भारत को अंतिम सबक
'इंडियन डिफेंस रिव्यू' के एडिटर भारत वर्मा ने कहा है कि निराश पेइचिंग के लिए भारत को अंतिम सबक सिखाने के कई कारण हैं। वह अपने देश में फैले आंतरिक असंतोष, बढ़ती बेरोजगारी और वित्तीय समस्याओं से अपने लोगों का ध्यान बंटाने के लिए यह कदम उठाएगा। वर्मा का कहना है कि भारत पर हमला कर चीन, एशिया में सर्वोच्चता सुनिश्चित करना चाहेगा।


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