मध्य प्रदेश में प्रतिदिन गायब होते हैं तीन लड़के या लड़कियां
प्रदेश से लापता होने वाले लड़के और लड़कियों की संख्या चौका देने वाली है। मई 04 से 30 अप्रैल 09 तक लापता हुए लड़के और लड़कियों की थानों में दर्ज कराई गई रिपोर्ट को देखें तो पता चलता है कि इन पांच सालों में कुल 41822 लापता होने की रिपोर्टे लिखी गई हैं। इनमें से 5813 अब भी लापता हैं।
कांग्रेस विधायक महेन्द्र सिंह द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में सोमवार को प्रदेश के गृह मंत्री जगदीश देवड़ा ने स्वीकार किया है कि प्रदेश से 3599 लड़कियां और 2214 लड़के लापता हैं, जिन्हें पांच सालों में पुलिस नहीं खोज पाई है। इन आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो एक बात जाहिर हो जाती है कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में ही लड़के और लड़कियां महफूज नहीं है। तभी तो पांच साल में सबसे ज्यादा लड़के और लड़कियां यहीं से लापता हुए हैं। भोपाल से लापता होने वाली लड़कियों की संख्या 542 है और लड़के 151 है। इस तरह कुल 693 लड़के और लड़कियां यहां से लापता हुए हैं।
प्रदेश की व्यावसायिक नगरी इन्दौर इस मामले में दूसरे नम्बर पर है। यहां से कुल 467 लड़के और लड़कियां लापता हुए हैं। इनमें लड़कियां 269 और लड़के 198 हैं। जबलपुर भी इस मामले में पीछे नहीं है। यहां से कुल 266 लड़के और लड़कियां लापता हैं जिनमें 115 लड़कियां और 151 लड़के हैं।
प्रदेश के जनजातीय बहुल जिलों पर नजर दौड़ाई जाए तो एक बात साफ हो जाती है कि इन इलाकों से लड़कों की तुलना में लड़कियां ज्यादा लापता हैं। धार से जहां 51 लड़के लापता है वहीं लापता लड़कियों की संख्या 224 है। छिन्दवाड़ा में लड़कों की तुलना में तीन गुना और सिवनी व झाबुआ में दो गुना लड़कियां गायब है। इसी तरह खरगौन, खंडवा, बड़वानी, बालाघाट, मंडला, डिन्डोरी से लड़कों की तुलना में लड़कियां ज्यादा गायब हैं।
जनजातीय इलाकों से लड़कियों के गायब होने से इन बातों को और बल मिलता है कि इन इलाकों की लड़कियों को देश के विभिन्न हिस्सों में ले जाकर बेच दिया जाता है। जनजातीय वर्ग की लड़कियां किसी हादसे का शिकार हुई हैं अथवा उन्हें बेचा गया है, इस बात का सरकारी रिकार्ड खुलासा नहीं करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications