परमाणु व्यापार पर जी-8 के रुख से चिंतित नहीं है भारत : मुखर्जी(लीड-1)
मुखर्जी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा, "हमें एनएसजी से पूरी छूट मिली हुई है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ देश की सुरक्षा से संबंधित हमारा विशिष्ट समझौता है। इसलिए जी-8 भारत के साथ परमाणु व्यापार की दिशा में क्या रुख अपनाता है, हम उससे चिंतित नहीं है।"
उन्होंने कहा, "एनएसजी का कोई भी देश हमसे व्यापार कर सकता है। भारत के साथ परमाणु करार के सिलसिले में शर्तो पर चर्चा के लिए जी-8 कोई उचित मंच नहीं है। जी-8 इसके लिए न तो प्रासंगिक है और न ही उचित अधिकारी। इसलिए हम इसे लेकर थोड़े भी चिंतित नहीं हैं।"
उल्लेखनीय है कि इटली में हुए जी-8 के सम्मेलन में पिछले सप्ताह एक प्रस्ताव पारित कर उन देशों पर जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, परमाणु यंत्रों, ईंधन, और तकनीकों के संवर्धन और प्रसंस्करण के हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगा दिया था।
भारत उन प्रमुख देशों में है जिसने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
पिछले साल एनएसजी ने परमाणु यंत्रों, ईंधन, और तकनीकों के बेचने के मामले में निर्यात नियमों में छूट दी थी। ऐसा करने के लिए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने एनएसजी के सदस्य देशों को समझाने-बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नजमा हेपतुल्ला ने शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए कहा कि जी-8 में यह प्रस्ताव पारित किए जाने से पहले क्या भारत से मश्विरा किया गया था। यदि नहीं तो ऐसा करके भारत की संवेदनशीलता को नजरअंदाज किया गया है। भारत को अतिरिक्त शर्तो की ओर धकेला जा रहा है जो हमें कतई मंजूर नहीं है।
उन्होंने कहा, "यह मामला बहुत गंभीर है। सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।"
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वृंदा करात ने जानना चाहा, "इस मामले में सदन को अंधेरे में क्यों रखा गया। यह सिर्फ सरकार का मामला नहीं है। सदन को आश्वस्त किया गया था कि भारत पर और शर्ते नहीं थोपी जाएंगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications