शहीद दिवस पर श्रीनगर में कड़े प्रतिबंध
वर्ष 1931 में आज ही के दिन डोगरा शासन के खिलाफ आंदोलन करने वाले 22 लोगों को एक जेल के बाहर मार दिया गया था।
हुर्रियत कांफ्रेंस के नरमपंथी धड़े के नेता मीर वाइज उमर फारुक ने लोगों से आज के दिन ख्वाजा नक्शबंद साहिब की दरगाह में स्थित शहीदों की कब्रगाह पर इकट्ठा होने की अपील की है। यह दरगाह शहर के पुराने हिस्से में स्थित है। यहां से लाल चौक तक मार्च की घोषण की गई है।
प्रशासन ने मार्च को रोकने के लिए रविवार शाम को ही लाल चौक और शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया है।
घाटी के अन्य शहरों में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
प्रतिबंध के कारण सोमवार को घाटी का जनजीवन पूरी तरह बाधित हो गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए सोमवार सुबह कब्रिस्तान गए।
पुलिस ने लाल चौक की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे हुर्रियत के कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।
हुर्रियत के नेता मीरवाइज उमर फारुक अपने नागिन आवास में अब भी नजरबंद हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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