मेट्रो हादसे में 6 की मौत, श्रीधरन ने इस्तीफा दिया (राउंडअप इंट्रो-1)
इस बीच केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एस.जयपाल रेड्डी ने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक ई.श्रीधरन के इस्तीफे पर संभवत: सोमवार को कोई फैसला लिया जा सकता है।
रेड्डी ने संवाददाताओं को बताया, "दिल्ली सरकार ने डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक की नियुक्ति की है। मैं इस मसले पर मुख्यमंत्री से चर्चा करूंगा और सोमवार को कोई निर्णय लूंगा।" दिल्ली मेट्रो केंद्र व राज्य सरकार का एक संयुक्त उपक्रम है।
दिल्ली मेट्रो स्थल पर यह दुर्घटना दक्षिणी दिल्ली के कैलाश कॉलोनी के पास जमरुदपुर में सुबह लगभग पांच बजे हुई। मेट्रो ट्रैक का कंकरीट का जो पुल गिरा वह केंद्रीय सचिवालय और बदरपुर के बीच मेट्रो के नए मार्ग का हिस्सा था।
खंभे पर रखी गई कंकरीट स्लैब को ऊपर चढ़ाने वाला लांचिंग गर्डर अचानक नीचे आ गिरा।
श्रीधरन ने कहा कि 66 व 67 नंबर खंभों के बीच हादसा इसलिए हुआ, क्योंकि खंभे का कैप क्षतिग्रस्त था। दोनों खंभों के बीच स्लैब के दस सेगमेंट खड़े करने थे। उनमें से पांच का काम पूरा हो गया था। छठा सेगमेंट जब चढ़ाया जा रहा था तो लांचिंग गर्डर असंतुलन के कारण टूट गया।
श्रीधरन ने कहा, "घटनास्थल पर काम में जुटे 20 लोग दुर्घटना की चपेट में आ गए। उनमें से छह की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए।"
डीएमआरसी की स्थापना के समय से ही उसके प्रमुख रहे श्रीधरन ने संवाददाताओं से कहा कि वह इस हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं और उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भेज दिया है। उन्होंने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया।
रविवार को ही अपना 77वां जन्म दिवस मनाने वाले श्रीधरन ने हादसे की जांच के लिए एक चार सदस्यीय समिति के गठन की भी घोषणा की। यह समिति 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
श्रीधरन ने संवाददाताओं से कहा, "मैं शुरू से ही मेट्रो का कामकाज देख रहा हूं। मैं हादसे की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं और पूरी नौतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए मैं मेट्रो के प्रबंध निदेशक के पद से इस्तीफा देता हूं।"
उन्होंने कहा, "मैं हालांकि सीधे तौर पर दुर्घटना से जुड़ा हुआ नहीं हूं लेकिन मैं संगठन का प्रमुख हूं और मुझे नैतिक जिम्मेदारी लेनी होगी।"
दिल्ली को विश्वस्तरीय मेट्रो रेल व्यवस्था मुहैया करवाने वाले श्रीधरन ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना को अपना इस्तीफा भेजा है।
इससे पहले डीएमआरसी के प्रवक्ता अनुज दयाल ने संवाददाताओं को बताया कि यह हादसा सुबह पांच बजे के आसपास दक्षिणी दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश के निकट जमरूदपुर इलाके में हुआ। इस हादसे की वजह से पानी की एक पाइपलाइन फट गई जिससे पूरे इलाके में पानी भर गया।
दयाल ने बताया कि हादसे में घायल हुए 15 लोगों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया गया है। घायल मजदूरों को एम्स, मूलचंद और सफदरजंग अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है।
मारे गए तीन लोगों की पहचान कर ली गई है जिसमें से एक साइट इंजीनियर अंशुमान और मजदूर निरंजन एवं बादल सिंह है। दयाल ने कहा कि एम्स में भर्ती दो लोगों की हालत गंभीर है।
घटना के समय मौके पर निर्माण कंपनी गैमन इंडिया लिमिटेड के कुल 30 मजदूर मौजदू थे। यह पुल केंद्रीय सचिवालय और बदरपुर लाइन पर बन रहा था, जिसे सितंबर 2010 तक पूरा किया जाना है।
प्रवक्ता ने कहा कि राहत कार्य आरंभ हो गया है। मलबा हटाने के लिए छह क्रेनों को लगाया गया है।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि जिन खंभों पर पुल को रखा जाना था, वे क्षतिग्रस्त थे। एक मजदूर ने कहा, "खंभे में दरार थी, इसकी शिकायत हमने ठेकेदार और अधिकारियों से की थी लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।"
संयुक्त पुलिस आयुक्त (दक्षिण) अजय कश्यप ने बताया, "फिलहाल हमारी प्राथमिकता राहत कार्य को जल्द पूरा करना है। हमने कंपनी के खिलाफ लापरवाही बरतने का मामला दर्ज कर लिया है। तकनीकी विशेषज्ञ इस मामले की जांच करेंगे।"
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने मारे गए लोगों के परिजनों को 500,000 रुपये, अपंग हुए लोगों को 200,000 रुपये और घायलों को 50,000 रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि यह हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है और इस घटना के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications