श्रमिकों के लिए कानून में संशोधन को सहमत हुए श्रम मंत्री (लीड-1)
सर्वोच्च न्यायालय में तीसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.बी.सिन्हा ने नेशनल लीगल सर्विस अथारिटी द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा कानून, 2008 की कई मामलों में आलोचना की।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा, "कानून में प्रवासी मजदूरों, खासतौर से अंतर्राज्यीय असंगठित प्रवासी मजदूरों की खास समस्याओं और उनकी सामाजिक सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।"
न्यायमूर्ति सिन्हा की इस टिप्पणी के बाद श्रम मंत्री खरगे ने वादा किया कि वह असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 में संशोधन करेंगे।
खरगे ने कहा, "संविधान में कई बार संशोधन किया जा चुका है। लिहाजा न्यायमूर्ति सिन्हा द्वारा बताई गई कमियों को दूर करने के लिए संविधान में इस संशोधन को लेकर कोई समस्या नहीं है।"
न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा, "यद्यपि कानून असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा अधिसूचित विभिन्न योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करता है, लेकिन योजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए कोई प्रतिबद्ध कोष विकसित करने की व्यवस्था यह कानून नहीं करता और इस निर्णय को केंद्र सरकार पर छोड़ देता है।"
सिन्हा ने कहा, "कानून को अमली जामा पहनाने के लिए किसी अलग प्रशासनिक तंत्र या आधिकारिक कार्यविधि का भी बंदोबस्त नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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