गलत साबित हुआ नक्सलवाद से समर्पण का फैसला!
भुवनेश्वर, 12 जुलाई (आईएएनएस)। चार साल पहले नक्सलवाद की राह छोड़ आम जिंदगी का सपना देखने वाली कांदिरी लोहार आज अपने फैसले पर पछता रही है। एक घर और आम जिन्दगी का सपना, आज वक्त के थपेड़ों ने उससे छीन लिया है। सरकारी दावे धरे के धरे रह गए हैं और कांदिरी का फैसला आज उसी पर भारी पर रहा है।
कांदिरी का समर्पण करवा कभी अपना पीठ थपथपाने वाली सरकार आज उससे किया अपना वादा तक नहीं निभा रही है। कांदिरी की शादी शंकर लोहार के साथ हुई जो सुंदरगढ़ जिले के बंधामुंडा का रहने वाला है। यह शादी वहां के पुलिस कप्तान के सामने हुई थी और उन्होंने 25 हजार नकद, जमीन व पति के लिए नौकरी का वादा भी किया था।
पर कांदिरी को मिली ससुराल की तकलीफ, शराबी पति और प्रताड़ना। अपने तीन साल के बच्चे के साथ ससुराल से खदेड़ दी गई कांदिरी आज सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाती नजर आ रही है।
सुंदरगढ़ के पुलिस कप्तान दिनेश सिंह ने आईएएनएस के बताया, "हम इस मामले को देख रहे हैं और कांदिरी के पुनर्वास में हर संभव मदद की कोशिश करेंगे।"
राज्य सरकार ने समर्पण करने वाले हर नक्सली को तत्काल मदद स्वरूप 10 हजार रुपये देने की घोषणा की है और जो हथियार के साथ समर्पण करते हैं उन्हें और भी सुविधा देने का वादा किया जाता है।
कांदिरी के मामले में वर्तमान पुलिस उपाधीक्षक सुरेश पथी (होम गार्ड) ने आईएएनएस को बताया कि उसे होम गार्ड में लिया जा सकता है पर कब तक यह कहा नहीं जा सकता।
इस तरह कांदिरी एक बार फिर वादे के नाव पर सवार है।
वैसे तो कांदिरी की शिकायत पर उसके पति को पुलिस हिरासत में लिया गया है पर आज वह अपने समर्पण के फैसले पर पछता रही है। उसे याद आते हैं वह क्षण जब वह पूरे सम्मान से अपने नक्सली साथियों के साथ रहती थी।
दरअसल यह केवल एक कांदिरी की कहानी भर नहीं है कमोबेश समर्पण करने वाले हर नक्सली की यही कहानी है।
देवगढ़ जिले के मेंदियाकानी गांव की पुष्पिका तिर्की ने जब आत्मसमर्पण किया तो उसे भी केवल वादे ही मिले। समर्पण के समय तो पुनर्वास और 25 हजार रुपये के वादे थे। मगर हकीकत यह है कि पुनर्वास के नाम पर अपने तीन साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने वाली पुष्पिका सम्बलपुर के नारी कारावास में कैद है और उस दिन को कोस रही है जब उसने आत्मसमर्पण किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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