मेट्रो हादसे में 5 मरे व 15 घायल, श्रीधरन का इस्तीफा (लीड-3)
श्रीधरन ने संवाददाताओं से कहा कि वह इस हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं और उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भेज दिया है। उन्होंने इस हादसे को अपने लिए एक बड़ा झटका करार दिया।
इससे पहले डीएमआरसी के प्रवक्ता अनुज दयाल ने संवाददाताओं को बताया कि यह हादसा सुबह पांच बजे के आसपास दक्षिणी दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश के निकट जमरूदपुर इलाके में हुआ। इस हादसे की वजह से पानी की एक पाइपलाइन फट गई जिससे पूरे इलाके में पानी भर गया।
दयाल ने बताया कि हादसे में घायल हुए 15 लोगों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया गया, जिसमें से तीन को मृत घोषित कर दिया गया। अन्य दो लोग मलबे में दबे हुए थे उनके भी मारे जाने की पुष्टि हो गई है। घायल मजदूरों को एम्स, मूलचंद और सफदरजंग अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है।
मारे गए तीन लोगों की पहचान कर ली गई है जिसमें से एक साइट इंजीनियर अंशुमान और मजदूर निरंजन एवं बादल सिंह है। दयाल ने कहा कि एम्स में भर्ती दो लोगों की हालत गंभीर है।
घटना के समय मौके पर निर्माण कंपनी गैमन इंडिया लिमिटेड के कुल 30 मजदूर मौजदू थे और इनमें से 20 मजदूर इस दुर्घटना की चपेट में आ गए। यह पुल केंद्रीय सचिवालय और बदरपुर लाइन पर बन रहा था, जिसे सितंबर 2010 तक पूरा किया जाना है।
प्रवक्ता ने कहा कि राहत कार्य आरंभ हो गया है। मलबा हटाने के लिए छह क्रेनों को लगाया गया है।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि जिन खंभों पर पुल को रखा जाना था वे क्षतिग्रस्त थे। एक मजदूर ने कहा, "खंभा में दरार थी, इसकी शिकायत हमने ठेकेदार और अधिकारियों से की थी लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।"
संयुक्त पुलिस आयुक्त (दक्षिण) अजय कश्यप ने बताया, "फिलहाल हमारी प्राथमिकता राहत कार्य को जल्द पूरा करना है। हमने कंपनी के खिलाफ लापरवाही बरतने का मामला दर्ज कर लिया है। तकनीकी विशेषज्ञ इस मामले की जांच करेंगे।"
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने मारे गए लोगों के परिजनों को 500,000 रुपये, अपंग हुए लोगों को 200,000 रुपये और घायलों को 50,000 रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि यह हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है और इस घटना के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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