गायब बाबरी दस्तावेज की सीबीआई जांच

इसके पहले राज्य सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का आदेश दिया था। इसकी कमान "भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी आनंद कुमार को जिम्मा सौंपा गया है। उन्हें 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।"
अयोध्या में मुगल काल में बनी बाबरी मस्जिद के स्थान पर भगवान राम का मंदिर था कि नहीं, इस विवाद को लेकर चल रहे मामले की सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर रहा है। कोर्ट ने फाइलों की चेरी मामले पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद राज्य सरकार ने यह फैसला किया।
न्यायमूर्ति रफत आलम की अध्यक्षता में इस तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता को तलब किया था और पूछा था, "फाइलें कहां हैं। क्या वे गुम हो गई हैं?" इससे पहले बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और जानेमाने वकील जफरयाब जिलानी ने अदालत से कहा था कि जो फाइलें गायब हुई हैं, वे इस मामले की जांच के लिए बिल्कुल प्रासंगिक हैं।
अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक जो दस्तावेज गायब हुए हैं उनमें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा गया वह पत्र भी है, जिसमें उन्होंने भगवान राम की मूर्ति को तत्काल हटाने को कहा था। गायब हुए दस्तावेजों में फैजाबाद के तत्कालीन जिलाधिकारी के.के. नायर का वह पत्र भी शामिल है जो उन्होंने राज्य सरकार को लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि वे विवादित स्थल से भगवान राम की मूर्ति हटाने और वहां साधुओं को भजन कीर्तन करने से रोकने में असमर्थ हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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