क्लिंटन के दौरे के दौरान परमाणु मुद्दे को उठाएगी सरकार

ज्ञात हो कि इस प्रतिबंध के चलते परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से परमाणु मसले पर हासिल की गई छूट बेकार साबित हो गई है।

इटली के ल'अक्वि ला में संपन्न हुए जी8 के घोषणा पत्र ने दुनिया के आठ अति विकसित देशों से वादा किया है कि जिन देशों ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, उन्हें ईएनआर प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण नहीं किया जाएगा। ये आठ विकसित देश एनएसजी में भी शामिल हैं।

ईएनआर प्रौद्योगिकी को लेकर जी8 के रुख ने भारत सरकार को सकते में डाल दिया है। क्योंकि यह प्रतिबंध एनएसजी द्वारा दी गई छूट को बेकार साबित कर देता है।

सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने कहा है कि क्लिंटन के नई दिल्ली दौरे के दौरान भारतीय नेता इस मामले को प्रमुखता से उठाएंगे। चर्चा के दौरान नागरिक परमाणु सहयोग का मामला पूरजोर तरीके से उठाया जाएगा।

भारत और अमेरिका के बीच हुए 123 परमाणु समझौते के अंतर्गत भारत अंतर्राष्ट्रीय निगरानी में एक समर्पित पुनशरेधन इकाई स्थापित करने वाला था, जिसके लिए अमेरिका ईएनआर प्रौद्योगिकी की आपूर्ति के लिए तैयार था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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