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मुंबई हमले के दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा चाहता है भारत : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

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जयदीप सरीन

प्रधानमंत्री के विशेष विमान से, 11 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अगले सप्ताह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी से होने वाली मुलाकात से पहले कहा कि भारत चाहता है कि पाकिस्तान मुंबई हमलों को अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने यहां भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल आतंकवादियों से निपटने के लिए विश्वसनीय कार्रवाई करने की जरूरत है।

इटली के ल'अक्वि ला शहर में जी8-जी5 की शिखर बैठक से लौटते समय एयर इंडिया के विशेष विमान में पत्रकारों से बातचीत में मनमोहन सिंह ने कहा कि मिस्र में गिलानी से मुलाकात के दौरान वह इसी की दोबारा पुष्टि चाहते हैं।

मिस्र के शरम-अल-शेख में अगले सप्ताह होने वाली गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शिखर बैठक के दौरान सिंह और गिलानी में मुलाकात का कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री मंगलवार को फ्रांस और मिस्र की यात्रा पर रवाना होंगे।

सिंह ने कहा, "मैं मिस्र में गिलानी से मुलाकात की प्रतीक्षा कर रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि इस बैठक में पाकिस्तान इस बात की फिर से पुष्टि करेगा कि वह मुंबई हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा और ऐसी गतिविधियों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं होने देगा। "

सिंह ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि पाकिस्तान की ओर से इस बात का पुख्ता भरोसा मिलेगा कि मुंबई हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और पाकिस्तानी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी नहीं कर पाएंगे। अगर पाकिस्तान की ओर से ये कदम उठाए जाते हैं तो दोनों देशों के संबंधों में कायम दूरी काफी हद तक कम हो सकती है।"

प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान के साथ समस्याएं हैं। उन्होंने कहा, "लेकिन मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। हमारे उच्चायुक्त ने आईएसआई प्रमुख और उनके विदेश मंत्रालय से इस बारे में बातचीत की है। हमें उम्मीद है कि वे मुंबई हमलों के दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।"

यह पूछने पर कि क्या मुंबई हमलों को लेकर पाकिस्तान के प्रति भारत का रुख नरम रहा, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को दक्षिण एशिया में शांति सुनिश्चित करने के लिए अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर काम करना पड़ा।

उन्होंने कहा, "मैंने अक्सर कहा है कि हम मित्र चुन सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं।"

उन्होंने कहा कि भारत करीब 25 साल से आतंकवाद का शिकार बनता आया है। सिंह ने कहा कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय नेताओं से अपील की है कि वे पाकिस्तान पर आतंकवाद छोड़कर मैत्री के मार्ग पर कदम बढ़ाने के लिए दबाव बनाए।

आर्थिक संकट से उबर सकता है भारत :

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें भारत के आर्थिक संकट से उबरने और 8-10 प्रतिशत की विकास दर को फिर से हासिल करने का विश्वास है। परंतु उन्होंने आगाह किया कि वैश्विक मंदी के वर्तमान दौर में अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक पर्यावरण से बहुत सहायता नहीं मिलने जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं इस विश्वास के साथ स्वदेश लौट रहा हूं कि 8-10 प्रतिशत की विकास दर दोबारा हासिल करने के लिए हमें अपने प्रयासों को मजबूत करना जारी रखना चाहिए। आने वाले कुछ समय तक अंतर्राष्ट्रीय वातावरण से बहुत सहायता नहीं मिलेगी। बहरहाल मेरा विश्वास है कि हमारी आर्थिक ताकत में तेज और समग्र विकास की गति को दोबारा वापस पाने की क्षमता है।"

उन्होंने कहा, "यह बैठक ऐसे समय पर हुई जब विकसित दुनिया के केंद्र में पैदा वित्तीय संकट से उत्पन्न मंदी से विश्व उबरने का प्रयास कर रहा है। इस बैठक के बाद मेरा मानना है कि स्थिति में कुछ सुधार दिखाई देने के बावजूद पहले की तरह आर्थिक विकास गति हासिल करने के लिए विश्व अर्थव्यवस्था को लंबा समय लगेगा।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं विशेषकर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान समय में अप्रासंगिक होने के भारत के रुख पर अंतर्राष्ट्रीय समर्थन बढ़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दबाव का विरोध करें भारत और चीन :

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत और चीन को जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विकसित देशों के दबाव का प्रतिरोध करने की आवश्यकता है।

औद्योगिक युग के आंरभ से ही विकसित देश पर्यावरण को सबसे अधिक प्रदूषित करने के लिए जिम्मेदार रहे हैं। अब उनमें से कुछ देश भारत, चीन और अन्य उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए कह रहे हैं।

दोनों देश इसके लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि इससे विकास प्रभावित होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत और चीन पर भारी दबाव है। हम इसका प्रतिरोध करेंगे। मैंने इटली में भारत का रुख अन्य देशों के नेताओं के सामने रखा।"

मनमोहन सिंह ने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था के नागरिक होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम उत्सर्जन पर नियंत्रण रखें। दूसरी तरफ सभी देशों पर यह जिम्मेदारी है कि व्यापार भी पहले की तरह चलता रहे।"

उन्होंने कहा, "हम संयम और अनुकूलन के जरिए अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंगे। मैंने भारत की जलवायु कार्य योजना-राष्ट्रीय मिशन प्रस्तुत किया है। यदि विकसित देश विकासशील देशों में स्वच्छ और स्थायी विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय और तकनीकी हस्तांतरण सुनिश्चित करें तो हम इस दिशा में और अधिक कार्य करने के इच्छुक हैं, जो जलवायु परिवर्तन को रोकने की रणनीति को मजबूत करने का प्रभावी उपकरण हो सकता है।"

उल्लेखनीय है कि इटली में जी-8 और जी-5 देशों के सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई।

भारत के प्रति सकारात्मक रुख रखते हैं ओबामा :

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनका प्रशासन भारत के प्रति सकारात्मक रुख रखता है।

इटली में अमीर देशों के संगठन जी-8 की शिखर बैठक में हिस्सा लेने गए सिंह ने ओबामा से मुलाकात की थी। शिखर बैठक में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौटते समय विशेष विमान में प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने पाया कि ओबामा भारत के प्रति बहुत सकारात्मक रुख रखते हैं। मैंने शुक्रवार सुबह उनके साथ महत्वपूर्ण समय बिताया।"

उन्होंने कहा, "हमने मुलाकात के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा की। मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति को बहुत अनुकूल पाया। इस बात को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है कि ओबामा प्रशासन हमारे प्रति सकारात्मक रुख नहीं रखता है।"

ओबामा और मनमोहन सिंह में कोई औपचारिक बैठक को तो नहीं हो सकी लेकिन दोनों नेताओं ने एक-दूसरे में अपने देश की यात्रा का निमंत्रण दिया । मनमोहन इसी साल अमेरिका जाएंगे जबकि ओबामा के अगले साल भारत आने की संभावना है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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