जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दबाव का विरोध करें भारत, चीन : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री के विशेष विमान से, 11 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत और चीन को जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विकसित देशों के दबाव का प्रतिरोध करने की आवश्यकता है।

औद्योगिक युग के आंरभ से ही विकसित देश पर्यावरण को सबसे अधिक प्रदूषित करने के लिए जिम्मेदार रहे हैं। अब उनमें से कुछ देश भारत, चीन और अन्य उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए कह रहे हैं।

दोनों देश इसके लिए तैयार नहीं। उनका कहना है कि इससे विकास प्रभावित होगा।

जी-8 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद इटली से लौटते समय प्रधानमंत्री ने कहा,"जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत और चीन पर भारी दबाव है। हम इसका प्रतिरोध करेंगे। मैंने इटली में भारत का रुख अन्य देशों के नेताओं के सामने रखा।"

मनमोहन सिंह ने कहा,"वैश्विक अर्थव्यवस्था के नागरिक होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम उत्सर्जन पर नियंत्रण रखें। दूसरी तरफ सभी देशों पर यह जिम्मेदारी है कि व्यापार भी पहले की तरह चलता रहे।"

उन्होंने कहा,"हम संयम और अनुकूलन के जरिए अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंगे। मैंने भारत की जलवायु कार्य योजना-राष्ट्रीय मिशन प्रस्तुत किया है। यदि विकसित देश विकासशील देशों में स्वच्छ और स्थाई विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय और तकनीकी हस्तांतरण सुनिश्चित करें तो हम इस दिशा में और अधिक कार्य करने के इच्छुक हैं,जो जलवायु परिवर्तन को रोकने की रणनीति को मजबूत करने का प्रभावी उपकरण हो सकता है।"

उल्लेखनीय है कि इटली में जी-8 और जी-5 देशों के सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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