जी-आठ देश देंगे 20 अरब डॉलर की मदद

जी-आठ देशों के नेताओं ने इटली में सम्मेलन के आख़िरी दिन खाद्य सामग्री की सप्लाई बढ़ाने के लिए 20 अरब डॉलर देने की घोषणा की है.
इस धनराशि का इस्तेमाल ग़रीब देशों में कृषि के विकास के लिए तीन वर्षीय योजना में किया जाएगा. ये राशि उम्मीद से करीब पाँच अरब डॉलर ज़्यादा है.
अफ़्रीकी नेताओं ने इससे पहले जी-आठ देशों से आग्रह किया था कि वो पूर्व में किए गए मदद के वादों को पूरा करे.
बीबीसी संवाददाता एंड्रयू वॉल्कर का कहना है कि ज़ोर इस बात पर है कि कैसे लोगों को इस काबिल बनाया जाए कि वो खाद्य सामग्री ख़ुद जुटा सकें.
इस मकसद को विकसाशील देशों के कृषि में ज़्यादा निवेश से हासिल किया जाएगा.
संवाददाता का कहना है कि ब्रिटेन, कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, रूस और अमरीका इसके लिए संसाधन उपलब्ध करवाएँगे.
अतिरिक्त पैसा
इस बार के सम्मेलन में जो पैसा दिया गया है उसमें सारी राशि नई नहीं है. कृषि विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय कोष के अध्यक्ष कनाया वांज़े ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि वे कृषि क्षेत्र में और पैसा लगाए जाने का स्वागत करते हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक अमरीका करीब 3.5 अरब डॉलर का योगदान देगा. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा शुक्रवार को अफ़्रीका के दौरे पर जा रहे हैं. इससे पहले वे अंगोला, अल्जीरिया, नाइजीरिया और सेनेगल के प्रतिनिधियों से इटली में मिलेंगे.
वैसे 2005 में हुए जी-आठ सम्मेलन में इन देशों ने मदद दोगुनी करने का जो वादा किया था, वो वादा ये देश पूरा नहीं कर पाएँ हैं.
कई राहत एजेंसियों ने इस बात के लिए जी-आठ देशों की आलोचना की है. मेज़बान इटली की ख़ासकर आलोचना हुई है क्योंकि उसने धनराशि बढ़ाने के बजाए कम कर दी है.
इटली के प्रधानमंत्री ने कहा है कि आर्थिक संकट और इटली पर बढ़ते कर्ज़ के कारण वो अपने वादे पूरे नहीं कर पाया है.
इससे पहले गुरुवार को विकसित और विकासशील देशों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि 1900 के स्तर के ऊपर तापमान दो डिग्री से ज़्यादा नहीं बढ़ना चाहिए.


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