मध्य प्रदेश में गांवों को बिजली दिन में सिर्फ 10 घंटे (लीड-1)
सरकार का कहना है कि प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और मांग के अन्तर को ध्यान में रखकर कटौती तय की गई है। इस समय संभाग स्तर पर तीन घंटे, जिला स्तर पर पांच घंटे, तहसील स्तर पर 12 घंटे और ग्राम स्तर पर 14 घंटे की बिजली कटौती जारी है। इसके अलावा होने वाली अघोषित कटौती तय नहीं है।
राज्य विधानसभा में प्रदेश की बिजली व्यवस्था के संदर्भ में विधायक संजय पाठक के सवाल का जवाब देते हुए राज्य के ऊर्जा मंत्री अनूप मिश्रा ने स्वीकार किया है कि प्रदेश में तीन से लेकर 14 घंटे तक की बिजली कटौती की जा रही है। ऊर्जा मंत्री ने बताया है कि निर्धारित कटौती के अलावा कोई अघोषित कटौती नहीं की जाती है, मगर मांग और आपूर्ति में आकस्मिक तौर पर आए अंतर के कारण सुरक्षा व स्थिरता को ध्यान में रखकर विद्युत कटौती करना पड़ती है जो आवश्यक हो जाती है।
उन्होंने बिजली दरों के संदर्भ में बताया कि इन दरों का निर्धारण अन्य प्रदेशों से तुलना करके नहीं, बल्कि विद्युत अधिनियम 2003 के तहत किए गए प्रावधानों के अनुसार मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग करता है। आयोग राष्ट्रीय टैरिफ नीति, नियामक आयोग द्वारा जारी नियम, वित्तीय जरूरत, औसत लागत तथा उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन को ध्यान में रखकर दरें तय करता है। इतना ही नहीं प्रति यूनिट दर का निर्धारण तकनीकी कारकों पर भी निर्भर करता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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