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समलैंगिक संबंध पर फिलहाल रोक नहीं

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Supreme Court
नई दिल्ली। सहमति से बनाए जाने वाले समलैंगिक संबंधों पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 29 जुलाई को करने का फैसला किया है। साथ ही केंद्र सरकार और नाज फाउंडेशन को नोटिस जारी की है कि वो अपनी-अपनी दलीलें पेश करें। उसके बाद यदि जरूरत पड़ी तभी दिल्‍ली हाई कोर्ट के फैसले पर कोई अंतरिम रोक लगाए जाने पर विचार किया जाएगा।

सहमति के साथ बालिग लोगों के बीच समलैंगिक संबंध को वैध घोषित करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली ज्योतिषी सुरेश कुमार कौशल की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और गैर सरकारी संगठन नाज फाउंडेशन को नोटिस जारी कर दी।

मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संबंधित पक्षों को सुनने के बाद यदि जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ किसी अंतरिम आदेश पर विचार किया जाएगा।

समलैंगिक शादियों पर अभियोग नहीं

कौशल की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि जब से दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आया है, तब से लेकर अब तक समलैंगिक विवाहों के सात मामले सामने आ चुके हैं। वकील ने इसे लेकर बहुत से सवाल उठाए और कहा कि इस चलन से विवाह संस्था पर असर पड़ेगा। जवाब में पीठ ने कहा कि इसमें विवाह की परिभाषा नहीं बदली है।

इसके बाद जब वकील ने समलैंगिक संबंधों के कुप्रभावों को गिनाना शुरू किया तो पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं करती। हालांकि कानून 1860 से लागू है, लेकिन बच्चों के साथ यौन संबंधों को छोड़कर दंड प्रावधान के तहत ऐसे सिर्फ कुछ ही मामले दर्ज हुए हैं। पीठ ने कहा, 'हमारी जानकारी के अनुसार समलैंगिक शादियों के लिए किसी पर भी अभियोग नहीं चलाया गया है।' लंबी बहस के बाद पीठ ने नोटिस जारी किया और सुनवाई की अगली तिथि 29 जुलाई निर्धारित कर दी।

जानवर भी ऐसा काम नहीं करते

गौरतलब है कि ज्योतिषी कौशल ने अपनी याचिका में कहा है, "इस तरह की अप्राकृतिक गतिविधियों के परिणाम की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। यहां तक कि जानवर भी ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होते। हाईकोर्ट के फैसले का परिणाम एड्स विषाणु एचआईवी के प्रसार के रूप में निकलेगा, क्योंकि 'पूरी तरह साबित हो चुका है कि यह संक्रमण इस तरह की यौन गतिविधियों से होता है।"

कौशल ने तर्क दिया, "हमें अपने धर्मग्रंथों को देखने और उनसे सीख लेने की जरूरत है जो समाज में इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ हैं। यदि इस तरह की असामान्यता को अनुमति दी जाती है तो कल को लोग जानवरों के साथ सेक्स करने की इजाजत मांग सकते हैं।"

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