जी-8 में पर्यावरण लक्ष्यों पर सहमति

जी-8 में पर्यावरण लक्ष्यों पर सहमति

विकसित देशों के समूह जी-आठ की बैठक के लिए इटली पहुँचे भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि ग़रीब देश पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका समझते हैं मगर उसकी वजह से उन्हें नुक़सान नहीं झेलना चाहिए. डॉक्टर सिंह ने साथ ही कहा कि आर्थिक मंदी के इस दौर में विकासशील देशों के लिए धन की उपलब्धता और संरक्षणवाद के विरोध पर इस बैठक में ज़ोर दिया जाएगा. जी-आठ की बैठक के साथ ही विकासशील देशों का भी एक गुट जी-पाँच इस बैठक में शामिल होने पहुँचा है. भारत, ब्राज़ील, दक्षिण अफ़्रीका, मैक्सिको और चीन इस जी-5 के सदस्य हैं. वहीं जी-आठ के नेताओं ने वर्ष 2050 तक ग्लोबल वॉर्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस से ऊपर न जाने के लिए सहमति जताई है. इस तरह जी-आठ देशों के इस सम्मेलन में दो बड़े मुद्दों पर सहमति हुई- एक कि विश्व को कितना गर्म होने दिया जा सकता है उसकी एक सीमा तय होनी चाहिए और दूसरा ये कि यह लक्ष्य हासिल करने के लिए ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना होगा.

कार्बन उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रस्ताव रखा गया है कि वर्ष 2050 तक उसमें पचास प्रतिशत कमी होनी चाहिए. इसमें से भी लगभग 80 प्रतिशत कटौती विकसित देशों में होनी चाहिए. पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय अनेक विशेषज्ञों ने दो डिग्री सेल्सियस की कटौती हासिल करने पर इस सहमति का व्यापक स्वागत किया है लेकिन यह भी कहा है कि वर्ष 2020 तक भी एक लक्ष्य रखा जाना चाहिए और इस परिवर्तन और उपलब्धि के लिए विकासशील देशों को ज़्यादा सहायता देनी चाहिए. इस बारे में भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह का कहना था, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय के ज़िम्मेदार सदस्य होने के नाते हमारा उत्तरदायित्व बनता है कि हम अपने पर्यावरण को संरक्षित रखने की अपनी ज़िम्मेदारी को स्वीकार करें. लेकिन पर्यावरण परिवर्तन का लक्ष्य विकासशील देशों में ग़रीबी के मुद्दे को नज़रअंदाज़ करके नहीं हासिल किया जा सकता." ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने भी जी- 8 सम्मेलन में कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि इस समूह के अन्य देश भी इन संकल्पों को अपना समर्थन देंगे. ब्राउन का कहना था, "विकसित देशों में कार्बन उत्सर्जन में वर्ष 2050 तक 80 प्रतिशत तक की कटौती करने पर सहमति हुई है. सम्मेलन में यह भी कहा गया है कि औसत तापमान में दो डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा बढ़ोत्तरी नहीं होनी चाहिए और ऐसा पहली बार हुआ है. ये लंबी अवधि के संकल्प हैं जिन पर जी 8 देशों के सम्मेलन में सहमति हुई है."

जी-8 सम्मेलन में यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वीडन के प्रधानमंत्री फ्रेडरिक रीनफ़ेल्ड ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्हें भरोसा है कि यह लक्ष्य नई तकनीक के विकास और उसके इस्तेमाल के ज़रिए हासिल कर लिया जाएगा. रीनफ़ेल्ड ने कहा, "स्वभाविक सी बात है कि हमें ये देखना होगा कि जब हम 2050 तक यह लक्ष्य हासिल करने की बात कह रहे हैं तो उसके लिए प्रौद्योगिकी विकास भी हो. और मेरा ख़याल है यह बिल्कुल संभव है. अगर मौजूदा प्रोद्योगिकी स्तर को ही आगे बढ़ाया जाए तो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अच्छी प्रगति हो सकती है." यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वीडन के प्रधानमंत्री फ्रेडरिक रीनफ़ेल्ड का यह भी कहना था कि ये लक्ष्य हासिल करने के लिए ऊर्जा के ग़ैर परंपरागत स्रोतों को बढ़ावा भी देना होगा. जी-8 देशों के इस सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक मंदी पर भी विचार किया गया. इस सम्मेलन में जो आकलन पेश किया गया वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कुछ घंटे पहले जारी किए गए आकलन से ही मिलता जुलता है. ये आकलन कहता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता के कुछ संकेत मिल रहे हैं लेकिन अब भी बहुत से जोखिम बने हुए हैं.

जी-5 की बैठक के दौरान ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा ने ब्राज़ीलियाई राष्ट्रीय फ़ुटबॉल टीम के खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाली एक टी-शर्ट भारतीय प्रधानमंत्री को भेंट की.

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