पूर्व शाही इमाम बुखारी का इंतकाल

शाही इमाम के निधन के बाद से दिल्ली की जामा मसजिद में हजारों लोगों का तांता लग गया। हजारों लोगों ने शाही इमाम के नमाज-ए-जनाजा में शिरकत की। बुखारी का जनाजा बुधवार को दोपहर करीब करीब 12 बजे जामा मसजिद लाया गया। यहां हजारों लोग उन्हें अंतिम सलाम करने पहुंचे। असर की नमाज के बाद जनाजे को मसजिद परिसर में आम लोगों के दर्शन लिए रखा गया। फिर इशां की नमाज के बाद उन्हें जामा मसजिद परिसर में ही सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
बुखारी का संघर्षपूर्ण जीवन
बुखारी का जन्म 1922 में राजस्थान के सांभर जिले में हुआ था। 8 जुलाई, 1973 को वे जामा मसजिद के शाही इमाम बने। खास बात यह है कि 8 जुलाई को ही उनका इंतकाल हुआ। करीब 55 साल तक जामा मसजिद की इमामत की तथा अन्याय एवं अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने से कभी नहीं चूके।
उन्होंने अपने जीवन में कई बार सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ मोर्चा लिया। उसके लिए वो कई बार कांग्रेस सरकार के खिलाफ भी गए, जिस कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उनकी रिहाई को लेकर देशभर में आंदोलन हुए, जिसके बाद उन्हें बिना शर्त रिहा कर दिया गया।


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