ऐतिहासिक ढाका पार्क में बनेगी स्मारकों की श्रृंखला
यह वही स्थान है जहां 16 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने भारतीय और बांग्लादेशी सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इसके अलावा भी इस पार्क से बांग्लादेश की स्वतंत्रता की अनेक यादें जुड़ी हैं।
इस ऐतिहासिक पार्क में ही बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान ने सात मार्च 1971 को स्वतंत्रता का आह्वान करते हुए भाषण दिया था। पाकिस्तानी जेल में नौ महीने बिताने के बाद 10 जनवरी 1972 को एक बार फिर वह यहां पहुंचे जहां लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया था।
समाचार पत्र 'न्यू एज' के मुताबिक बुधवार को उच्च न्यायालय के न्यायधीश ए.बी.एम. खरुल हक और न्यायमूर्ति एम. ममताजुद्दीन अहमद ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वह एक समिति का गठन करे जिसमें राजनीतिज्ञों, इतिहासकारों, मानवविज्ञानियों और स्वतंत्रता संग्राम के सेक्टर कमांडरों को स्थान दिया जाए।
न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक ये सभी मिलकर तीन महीने की अवधि में उन ऐतिहासिक स्थलों का चुनाव करेंगे जहां स्मारकों का निर्माण किया जाना है।
न्यायालय ने यह निर्देश सन 1971 की लड़ाई में शामिल रहे देश के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल (सेवानिवृत्त) के. एम. शफीउल्लाह और इतिहासकार मुंतजिर मामुन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
उन्होंने अपनी याचिका में पार्क में स्थित दो राष्ट्रीय धरोहर स्थलों को संरक्षित किए जाने की बात उठाई थी।
न्यायालय ने कहा, "बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान न केवल राष्ट्रपिता हैं बल्कि वे देश की स्वतंत्रता के शिल्पकार और उसके प्रतीक भी हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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