बिहार की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे, फिर भी प्रशासन सतर्क

बिहार की प्रमुख नदियों की बात करें तो पिछले वर्ष बिहार में तबाही मचा चुकी कोसी नदी में गुरूवार को बराह क्षेत्र में 68 हजार क्यूसेक जबकि वीरपुर बैराज में 8,31,795 क्यूसेक जलस्राव हो रहा है।

वीरपुर बैराज के अधीक्षण अभियंता एम़ एफ. हमीद ने गुरूवार को बताया कि मंगलवार को कोसी बैराज से जलस्राव 99 हजार 430 क्यूसेक जबकि बुधवार को जलस्राव मात्र 89,086 क्यूसेक था। उन्होंने बताया कि जलस्राव के कम होने से बैराज में या तटबंधों पर दबाव कम अवश्य हुआ है।

ज्ञात हो कि तीन जुलाई को वीरपुर बैराज से इस वर्ष का सबसे ज्यादा एक लाख 88 हजार 546 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।

पटना में बने बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक राज्य की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही है। नियंत्रण कक्ष के अधीक्षण अभियंता मुनीलाल रजक ने गुरूवार को बताया कि कोसी नदी का वाल्मीकीनगर में जलस्राव मात्र 71,300 क्यूसेक है। उन्होंने बताया कि बिहार की प्रमुख नदियों में सीतामढ़ी के सोनाखान में बागमती समुद्र तल से 67़ 95 मीटर ऊपर, समस्तीपुर में बूढ़ी गंडक 41़ 50 मीटर तथा बक्सर में गंगा 49़ 75 मीटर ऊपर बह रही हैं। इसी तरह झंझारपुर में कमला नदी समुद्र तल से 68़15 मीटर उपर बह रही है। उन्होंने बताया कि ये सभी नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।

राज्य के जल संसाधन मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि सभी संवेदनशील तटबंधों का निरीक्षण करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक किसी तटबंध के टूटने की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां कमजोर तटबंध हैं वहां मरम्मत का कार्य भी करवाया जा रहा है।

इस बीच राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग बाढ़ से निपटने के लिए पंचायत स्तर से जिला स्तर तक आपदा प्रबंधन कमेटी का गठन कर रहा है तथा बाढ़ से जूझने वाले लोगों का दल बना कर इस तरह प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे अपने साथ-साथ दूसरों की भी जान बचा सकें।

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव पी़ एऩ राय ने गुरूवार को आईएएनएस से चर्चा करते हुए बताया कि पंचायत, प्रखंड तथा जिला स्तर पर ऐसे दल गठित किये जाएंगे।

राय के अनुसार किसी दल के जिम्मे नाव का प्रबंधन होगा तो कोई बचाव और राहत कार्य में सरकार का हाथ बंटाएगा। कोई दल लोगों को अचानक आई बाढ़ के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए गांव के लोगों की मदद करेगा।

गांव के दल ही 'गांव प्लान' बनाएंगे और इस प्लान में गांव की सारी जानकारी उपलब्ध रहेगी। यही प्लान राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के पास भी होगा जिससे किराजधानी में बैठकर ही गांव की हकीकत जानी जा सके।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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