'मप्र की राशि में केंद्र ने की एक हजार करोड़ रुपये की कटौती'
विधानसभा परिसर में बुधवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आम बजट से पहले राज्य के वित्त अधिकारियों से हुई चर्चा में केन्द्र सरकार की ओर से प्रदेश को 12 हजार 14 करोड़ रुपये देने का आश्वासन मिला था। इसी आधार पर राज्य सरकार ने योजनाएं बनाई हैं। मगर जो बजट आया है उसमें मध्य प्रदेश को मिलने वाली राशि में लगभग एक हजार करोड़ की कटौती कर 11 हजार 41 करोड़ रुपये ही दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अपने संसाधन और केंद्र से मिलने वाली राशि के आधार पर योजनाएं बनाता है। केंद्र से मिलने वाली राशि में कटौती की गई है, जिससे योजनाओं पर असर पड़ना तय है। इतना ही नहीं केंद्र से विभिन्न योजनाओं में मिलने वाली राशि में राज्य को भी अंशदान देना होता है। अंशदान का प्रतिशत अलग-अलग होने से राज्य को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनकी मांग है कि अंशदान को एक समान किया जाए।
शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के साथ प्राकृतिक आपदा के लिए दी जाने वाली राशि में भी उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र को तो मांग के अनुरूप सहायता राशि दी गई है। मगर मध्य प्रदेश से भेदभाव किया गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के कर्मचारियों को छठे वेतनमान का लाभ देने का संकल्प फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि उनकी केंद्र से मांग है कि वह राज्य सरकार को इस आर्थिक भार को वहन करने में मदद करें। इसके लिए उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि राज्य के कर्मचारियों के वेतन में इजाफा होने पर आयकर की वसूली से लाभ केंद्र सरकार को होगा। लिहाजा केंद्र प्रदेश को सहायता करे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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