भूकंप के साए में जी-8 शिखर सम्मेलन आरंभ (लीड-1)
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार अमेरिका, रूस और फ्रांस के राष्ट्रपति, ब्रिटेन, कनाडा, इटली और जापान के प्रधानमंत्री तथा जर्मनी की चांसलर ने तीन महीने पहले भूकंप से तबाह मध्यकालीन शहर में बैठक आरंभ किया।
बैठक में यूरोपीय संघ के कार्यकारी निकाय के प्रमुख और चक्रीय प्रणाली के तहत नियुक्त अध्यक्ष भी उपस्थित थे।
जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों के किसानों को सहायता के मुद्दों पर चर्चा के लिए जी-8 सम्मेलन में गुरुवार को ब्राजील, भारत, दक्षिण अफ्रीका और मेक्सिको भी शामिल होंगे।
चीन के राष्ट्रपति को भी बैठक में हिस्सा लेना था लेकिन उत्तर पश्चिमी शहर उरुमकी में हुई जातीय हिंसा से निपटने के लिए उन्हें स्वदेश लौटने को बाध्य होना पड़ा।
इससे पहले भूकंपग्रस्त शहर ल'अक्विला में आठ से 10 जुलाई तक होने वाले जी-8 और जी-5 के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए राष्ट्राध्यक्षों को अधिकारियों ने आपात निकास योजना की जानकारी दी गई।
ल'अक्विला पहुंचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत सभी राष्ट्राध्यक्षों को निकास योजना के बारे में बताया गया। किसी भी आपात स्थिति में यहां से 100 किलोमीटर दूर स्थित रोम तक उड़ान के लिए 12 हेलीकाप्टरों को तैयार रखा गया है।
जी-8 सम्मेलन में हिस्सा लेने आए नेताओं के एजेंडे में यद्यपि भूकंप नहीं है, फिर भी जब वे आर्थिक मंदी, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए जुटेंगे तो उनके दिमाग में वह अवश्य होगा।
इस सम्मेलन में दुनिया की अर्थव्यवस्था के 90 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों के राष्ट्राध्यक्ष उपस्थित हैं।
यह शिखर बैठक लअक्वीला शहर में हो रही है जो इस साल अप्रैल में जबरदस्त भूकंप में तबाह हो गया था। इसमें करीब 300 लोग मारे गए थे और 1500 से ज्यादा घायल हुए थे। करीब 60,000 बेघर भी हुए। भूकंप का झटका यहां पिछले शुक्रवार (तीन जुलाई) को भी महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 थी।
जिस इमारत में शिखर सम्मेलन होगा उसे भूकंपरोधी कहा जा रहा है। पहले शिखर सम्मेलन का आयोजन सार्डिनिया समुद्र तट पर स्थित ला मेडेलिना शहर में होना था लेकिन भूकंप पीड़ितों के प्रति दुनिया की एकजुटता दिखाने के लिए इटली सरकार ने सम्मेलन के आयोजन स्थल में बदलाव किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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