जामा मस्जिद के पूर्व शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी का निधन (लीड-1)
बुखारी ने वर्ष 2000 में ही अपने पुत्र सैयद अहमद बुखारी को मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा 17वीं सदी में बनवाई गई जामा मस्जिद का शाही इमाम बना दिया था, लेकिन उन्होंने अपनी उपाधि को नहीं छोड़ा था।
मस्जिद के प्रवक्ता अमानुल्लाह खान ने आईएएनएस को बताया कि बुखारी का निधन सुबह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हुआ, जहां उन्हें सांस की समस्या के कारण नौ जून को भर्ती कराया गया था।
राजस्थान में जन्मे और दिल्ली में शिक्षा अर्जित करने वाले बुखारी देश की आजादी से एक साल पहले 1946 में नायब शाही इमाम बने थे।
वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ प्रचार कर वह काफी चर्चित हुए। उसके बाद से राजनीतिक दलों ने उनका समर्थन हासिल करने की कोशिशें शुरु कर दीं। उन्होंने बाबरी मस्जिद आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।
प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वान मौैलाना वहीदुद्दीन खान ने आईएएनएस से कहा, "इमाम साहब एक ऊर्जावान शख्सियत थे। इमाम का कार्य करने के अलावा वह सामाजिक और राजनीतिक मामलों को उठाने में भी हमेशा हिस्सेदारी करते रहे। उन्होंने वर्ष 1947 में भी एक रचनात्मक भूमिका निभाई।"
जामा मस्जिद के समीप स्थित फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने कहा कि पिछले 30 वर्षो से बुखारी एक संघर्षकर्ता बन गए थे।
उन्होंने कहा,"इमाम एक महान शख्सियत थे। वह निडर व्यक्ति थे। वह समुदाय से संबंधित मुद्दों पर कार्य करने के लिए सरकार पर दबाव डालने का प्रयास करते थे। आपातकाल के बाद वह इसमें और अधिक सक्रिय हो गए थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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