परमाणु हथियार घटाएंगे अमेरिका, रुस

इस संधि के अनुसार दोनों देश अपने परमाणु हथियारों की संख्या घटा कर डेढ़-डेढ़ हजार करेंगे। इसके अलावा दोनों देश इन हथियारों को लक्ष्य तक पहुंचाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या में भी 500 से 1100 के बीच कटौती करेंगे। यह समझौता 31 जुलाई 1991 को हस्ताक्षरित शीत युद्धकालीन स्टार्ट संधि का स्थान लेगा, जिसकी मियाद 5 दिसंबर को समाप्त होने जा रही है।
इतना ही नहीं ओबामा की यह रुस यात्रा अमेरिका के लिए कई अन्य सौगातें भी ले आई। अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी व नाटो सैनिकों को साजो-सामान पहुंचाने के लिए रूस ने अपने वायु मार्ग का इस्तेमाल करने की इजाज़त दे दी है। जिसके तहत हर वर्ष 4,500 अमेरिकी सैन्य विमान रूस से होकर अफ़ग़ानिस्तान जा सकेंगे। इसके अलावा रूस, अफगानिस्तान में जारी जंग में अमेरिका की मदद के लिए भी तैयार हो गया है।
हालांकि इसके लिए ओबामा को भी रुस की कुछ शर्तें माननी होंगी क्योंकि पोलैंड और चेक गणराज्य में अमेरिकी मिसाइल प्रतिरोधी प्रणाली लगाने को लेकर दोनों देशों में अभी भी मतभेद हैं। अमेरिका और रूस के इस फैसले से न केवल दोनों देशों के रिश्ते बेहतर होंगे बल्कि पूरे विश्व के देशों पर परमाणु हथियारों का प्रसार रोकने और नाभिकीय सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ेगा।


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