प्रधानमंत्री ने मंदी,जलवायु परिवर्तन के लिए विकसित देशों को जिम्मेदार ठहराया

एक बयान में प्रधानमंत्री ने कहा,"मौजूदा वैश्विक वित्तीय और आर्थिक संकट के भारत जैसे विकासशील देशों के विकास उद्देश्यों को क्षति पहुंचाने के हम प्रत्यक्षदर्शी हैं।

यह संकट हमारा पैदा किया हुआ नहीं है लेकिन हम इसके परिणामों को भुगत रहे हैं। विकसित देशों में मंदी ने हमारे निर्यातों को प्रभावित किया, संरक्षणवाद को मजबूत किया और कर्ज तथा मुद्रा प्रवाह पर प्रभाव डाला।"

उन्होंने कहा,"जलवायु परिवर्तन चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय है। विकासशील देश जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित हैं। हम आज जो देख रहे हैं वह विकसित देशों की दो सदियों की औद्योगिक गतिविधियों और उच्च खपत वाली जीवनशैली का परिणाम है।

उन्हें यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी उठानी होगी। संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के अंदर जलवायु परिवर्तन पर बाली कार्य योजना पर अंतर्राष्ट्रीय चर्चाओं में भारत सक्रिय रूप से हिस्सेदारी करेगा। "

प्रधानमंत्री के बयान के अनुसार," व्यवस्थागत विफलताओं से निपटने और असली अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए हम

ठोस और बेहतर समन्वय वाली अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया देखना चाहते हैं। लंबे समय में हम विकसित देशों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रशासन में विकास प्रक्रिया में उच्च स्थिरता और निरंतरता चाहते हैं।"

बयान में कहा गया है कि विश्व अर्थव्यवस्था और वित्तीय संकट का विकास पर प्रभाव ,खाद्य सुरक्षा,ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन,

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भारतीय रुख को प्रस्तुत करने का यह एक अवसर होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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