ईवीएम मामले पर तेज हुई राजनीति

आडवाणी ने एक अखबार से बातचीत में कहा था कि जब तक चुनाव आयोग ईवीएम से चुनावी धांधलियां न किए जाने को लेकर सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक उसे अगले विधानसभा चुनावों में वोटिंग मत पत्रों से करानी चाहिए। सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा है कि ईवीएम की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों की जांच बेहद गंभीरता से की जानी चाहिए। खासकर इस बात को देखते हुए कि ज्यादातर देशों में वोटिंग अब मतपत्रों से ही कराई जा रही है।
उधर, जेडीएस चीफ एच. डी. देवगौड़ा का आरोप है कि "ईवीएम में गोपनीयता नहीं बरती जा सकती। इस सिस्टम को हटाना होगा। हमारी पार्टी ने चुनाव से पहले ईवीएम की खामियों को गिनाया भी था।" एलजेपी के महासचिव अब्दुल खालिद ने कहा कि "हमारी पार्टी ईवीएम के इस्तेमाल को बंद कर मतपत्रों से वोटिंग कराने की मांग करती है। जब संसद के भीतर पोलिंग में गड़बड़ी हो जाती है तो ईवीएम कैसे फूलप्रूफ हो सकती हैं।"
इस बीच, आरजेडी ने बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए द्वारा ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच कराने के लिए चुनाव आयोग के पास जाने का फैसला किया है। पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी की सीनियर नेता राबड़ी देवी और शकील अहमद खान ने कहा कि "आयोग को ईवीएम से छेड़छाड़ की बड़े पैमाने पर आई शिकायतों की जांच करानी चाहिए।"
वहीं चुनाव आयोग ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर राजनीतिक दलों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग ने एक बयान में कहा है कि वह ईवीएम की कार्यप्रणाली से पूरी तरह संतुष्ट है। इनसे छेड़छाड़ संभव नहीं है। ईवीएम की कार्य प्रणाली फुल प्रूफ है। हालांकि चुनाव आयोग ने यह भरोसा भी दिलाया है कि वह ईवीएम के बारे में राजनीतिक दलों की आशंका दूर करने की कोशिश करेगा।
ईवीएम की कार्यप्रणाली पर शक करने के लिए आडवाणी को कांग्रेस ने आड़े हाथों लिया। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी के अनुसार, यह चुनाव में हारी हुई पार्टी के एक शीर्ष नेता का हैरत भरा बयान है।


Click it and Unblock the Notifications