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उद्योग जगत की मिश्रित प्रतिक्रिया

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उद्योग जगत की मिश्रित प्रतिक्रिया

उद्योग जगत ने सोमवार को पेश इस साल के बजट पर मिश्रित प्रतिक्रिया देते हुए इसे आम आदमी पर केंद्रित बजट बताया है.

भारत के उद्योग और वाणिज्य मामलों से जुड़े संगठन एसोचैम ने इस बजट को आम आदमी पर केंद्रित करार देते हुए कहा कि इसमें कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ध्यान रखा गया है.

एक बयान में एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने कहा कि इससे सामान और सेवाओं की माँग काफ़ी बढ़ेगी और यही आज के समय की माँग है.

उन्होंने कहा, "फ़्रिंज बेनिफ़िट टैक्स और सामान को लाने- ले जाने पर लगाए जाने वाले टैक्स को समाप्त करना मुख्य रूप से स्वागत योग्य कदम है् और इससे उद्योगों को अपना आधारभूत ढाँचा मज़बूत करने में मदद मिलेगी."

बजट में ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्र के लिए बनाई गई योजनाओं का समर्थन करते हुए एसोचैम ने कहा कि सरकार का पेश बजट विकास को बढ़ाएगा जिसके लक्षण दिखने लगे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि जो सेक्टर मंदी से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं उन्हें कुछ और राहत दी जानी चाहिए थी.

अंसल एपीआई के उपाध्यक्ष और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणव अंसल ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम संसद में पेश बजट का स्वागत करते हैं. यह बजट कुल मिलाकर देश के आम आदमी पर केंद्रित है.

उन्होंने कहा कि बजट में अनेक छूट, शिक्षा, रोज़ग़ार के लिए अनुदान और स्वयंसेवी गुटों को मदद दी गई है.

उनके अनुसार, "देश को दुनिया के विकसित देशों की श्रेणी में लाने के लिए गरीबी का स्तर घटाने की ज़रूरत पर भी ध्यान दिया गया है."

उद्योगों के संबंध में उन्होंने सरकार के उस कदम की तारीफ़ की जिसके मुताबिक़ उन सामानों को कर से मुक्त किया जाएगा जो काम के स्थल पर ही बनाई जाती हैं. उन्होंने कहा कि इससे लोगों की रचनात्मकता में वृद्धि होगी.

उधर जनरल मोटर्स के कार्यकारी निदेशक कार्ल स्लैम ने बजट को उत्साहवर्धक बताते हुए कहा कि इसमें आधारभूत ढाँचे, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य सेवाएं और दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का ध्यान रखा गया है.

उन्होंने कहा, "जहाँ तक वाहन उद्योग का सवाल है, बजट हमारी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है. इस क्षेत्र में कर कम करने के बजाय बड़ी कारों पर 20 हज़ार रुपयों का अतिरिक्त कर लगा दिया गया है."

उनके अनुसार, "हालाँकि फ़्रिंज बेनिफिट टैक्स को समाप्त करना स्वागत योग्य है."

बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में एक्शनएड ने कहा कि हालाँकि सामाजिक क्षेत्रों के लिए की गई घोषणाएं स्वागत योग्य हैं लेकिन फिर भी इन्हें प्रभावी रूप से लागू करना बहुत मुश्किल मालूम पड़ता है.

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