बजट से निराश हुआ उद्योग जगत

बजट को कुल मिलाकर "निराशाजनक" बताते हुए पुरोहित ने कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए वित्त मंत्री को साहसिक उपाय अपनाने चाहिए।
वहीं भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन ने इस बजट को संतुलन बनाने की कठिन कोशिश बताया है। मुखर्जी के बजट भाषण के बाद टीवी पर चर्चा के दौरान रंगराजन ने कहा, "एक ओर सरकार को जहां अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक खर्च बढ़ाना होगा वहीं दूसरी ओर बजटीय घाटा भी नियंत्रित रखना होगा।"
रंगराजन ने कहा कि बजट में खर्चो के बंटवारे के अंदाज से वह प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा "स्तर ही नहीं बल्कि संयोजन को भी अच्छी तरह से वितरित किया गया है।"
वहीं ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज (एआईएआई) ने वर्ष 2009-10 के लिए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा पेश किए गए आम बजट को विकासोन्मुखी बताया है। इस संगठन ने निर्यात के लिए बुनियादी सुविधाओं, कृषि और लघु व मझोले उद्यमों के क्षेत्र में आवंटन बढ़ाए जाने का स्वागत किया है।
एआईएआई के अध्यक्ष विजय कलंत्री के मुताबिक रेलवे के मद में 5000 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय राजमार्गो के लिए आवंटन में 23 फीसदी वृद्धि, ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए 7000 करोड़ रुपये और जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरन मिशन के मद में 87 फीसदी की वृद्धि किए जाने से देश में नौकरियां बढ़ेंगी और विकास तेज होगा।
कलंत्री ने एक बयान जारी कर कहा, "सिंचाई क्षेत्र में 75 फीसदी आवंटन बढ़ाए जाने से कृषि उद्योग क्षेत्र को लाभ होगा।" उन्होंने कहा, "बाजार विकास योजना के मद में राशि में की गई वृद्धि भी स्वागत योग्य कदम है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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