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आम बजट : मंदी से निपटने और कल्याणकारी व आधारभूत परियोजनाओं पर जोर (राउंडअप)

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वैश्विक वित्तीय संकट से प्रभावित उद्योग जगत और आमआदमी की भारी उम्मीदों के बीच पेश इस बजट में किसानों के लिए नए प्रोत्साहन, ग्रामीण विकास व रोजगार के लिए धन में भारी वृद्धि, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के साथ ही शहरी विकास के लिए कोष को बढ़ाने के साथ ऊर्जा सुरक्षा के लिए धन का आवंटन बढ़ाने का प्रस्ताव है।

अपने करीब 100 मिनट के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव कर गरीब परिवारों को तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्रति माह 25 किलो चावल या गेहूं उपलब्ध कराने के साथ ही गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वालों के लिए नई स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए आवंटन में 40 फीसदी की बढ़ोतरी करने की घोषणा की।

सफेद रंग के बंद गले का सूट पहले 73 वर्षीय मुखर्जी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार समावेशी और समान विकास सुनिश्चित करने के लिए अपने एजेंडे पर आगे बढ़ने के साथ युवा भारत की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करेगी। मुखर्जी इससे पहले स्वर्गीय इंदिरा गांधी की सरकार में 1982 से 84 के बीच तीन बार आम बजट पेश कर चुके हैं।

उन्होंने आर्थिक विकास की दर में आई गिरावट के संदर्भ में कहा, "सरकार चुनौतियों को स्वीकार करती है।" वित्तीय संकट के कारण देश की विकास दर औसत नौ फीसदी से गिरकर बीते वित्त वर्ष में 6.7 फीसदी हो गई थी। उन्होंने कहा, "पहली चुनौती सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के विकास की दर को नौ फीसदी पर लाना है।"

उन्होंने कहा कि अन्य चुनौती बेहतर प्रशासन और विकास का फल समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचाने की है।

बजट पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "वित्त मंत्री ने एक शानदार काम किया है।" उन्होंने कहा कि बजट का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मंदी के असर को कम करना है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "कुल मिलाकर इस बजट की रणनीति अर्थव्यवस्था की तेज विकास दर का पुनर्निर्धारण करना है। यह जनता से किए गए वादे को पूरा करने के लिए उठाया गया कदम है।"

यद्यपि वित्त मंत्री की ये घोषणाएं देश के शेयर बाजार में जान फूंकने में नाकामयाब रही और बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 870 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

भारतीय उद्योग जगत ने वर्तमान परिस्थितियों में बजट प्रस्तावों का मोटे तौर पर स्वागत किया है लेकिन करों में कुछ और छूट की आशा जताई है।

उद्योग जगत को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने कमोडिटी ट्रांजेक्शन कर और फ्रिंज बेनिफिट कर को खत्म करने की घोषणा की। हालांकि कारपोरेट कर में कोई बदलाव नहीं किया गया है और न्यूनतम आल्टरनेट टैक्स को बुक प्रोफिट के 10 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी करने का प्रस्ताव है। बुक प्रोफिट वह लाभ होता है जिसका उपयोग नहीं किया जाता है।

मुखर्जी ने कारपोरेट जगत को खुश करने के लिए फ्रिंज बेनिफिट टैक्स को खत्म करने के अलावा पूरे भारत में एक अप्रैल से एक समान वस्तु एवं सेवा कर लगाने और राजनीतिक चंदे पर कर में 100 फीसदी की छूट देने की घोषणा की।

बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर छूट की सीमा में 15 हजार रुपये जबकि महिलाओं व अन्य के लिए इसमें 10 हजार रुपये की वृद्धि की गई है। आयकर पर 10 फीसदी के सरचार्ज को खत्म करने का ऐलान किया गया है।

मुखर्जी ने कहा कि आधारभूत संरचानाएं विशेषकर सड़क, राजमार्ग और ऊर्जा भी उनकी प्राथमिकता में है। उन्होंने अपनी तरफ से यह सुनिश्चित किया है कि इन सेक्टरों को पर्याप्त धन मिले।

उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार का खर्च छह दशक पहले पेश पहले आम बजट के 193 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,20,800 करोड़ रुपये हो गया है।

मुखर्जी ने कहा कि उद्योग जगत अब भी वित्तीय संकट की चपेट में है और सरकार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के रूप में उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन मुहैया करवा रही है।

वित्त मंत्री ने सेट टॉप बॉक्स, एलसीडी टेलीविजन और महंगे कपड़े के समानों पर सीमा शुल्क बढ़ाने की घोषणा की ताकि घरेलू उत्पादों को संरक्षित किया जा सके। उन्हें बड़े वाहनों ओर ट्रकों पर उत्पाद शुल्क घटाने की घोषणा की।

मुखर्जी ने आशा जताई चालू वित्त वर्ष गैर योजनागत खर्च 37 फीसदी बढ़कर 6,95,689 करोड़ रुपये जबकि योजनागत खर्च 34 फीसदी बढ़कर 3,25,149 करोड़ रुपये हो जाएगा।

उन्होंने खर्च में कुल 36 फीसदी वृद्धि की घोषणा करते हुए कहा कि कुल ऋण उच्च स्तर पर रहेगा और बजट घाटा पिछले वित्त वर्ष छह फीसदी से बढ़कर 6.8 फीसदी हो जाएगा।

बजट में रक्षा मद में 1,41,703 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जबकि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के लिए आवंटन में 39,100 करोड़ की वृद्धि की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए आवंटन में 2057 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है। ग्रामीण आवास योजना के लिए 20 हजार करोड़ और ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के लिए सात हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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