आम बजट: उत्तर प्रदेश में थोड़ी खुशी, थोड़ा गम (लीड-1 )

लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाली गृहिणी श्वेता शुक्ला ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण के लिए वित्त मंत्री ने कोई बात नहीं की। जिस गति से महंगाई बढ़ रही है, उससे आज गृहिणियों के सामने रसोई चलाना सबसे बड़ी चुनौती है। वित्त मंत्री को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए था।

सिटी मांटेसरी स्कूल की अध्यापिका रुपाली सेन कहती हैं, "हमें प्रणब मुखर्जी से बहुत उम्मीदें थी कि वह इस बार ऐसा बजट पेश करेंगे जिसमें कम से कम दो लाख रूपये तक की सालाना आय आयकर मुक्त रहेगी, लेकिन उन्होंने बहुत ही मामूली राहत दी है। इससे हमें निराशा हुई है।"

लखनऊ विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए. के.सेनगुप्ता ने आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वित्त मंत्री ने संतुलित बजट पेश किया है। उन्होंने कारपोरेट सेक्टर से लिए ज्यादा कुछ नहीं किया है, लेकिन सोशल सेक्टर पर बजट में खासा ध्यान दिया गया है।

सेनगुप्ता ने कहा कि बजट में वर्ष 2009-10 में कृषि ऋण बढ़ाकर 3.25 करोड़ रुपये करने प्रस्ताव, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना(नरेगा) के लिए ढाई गुना राशि बढ़ाने का प्रस्ताव, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना जैसी कृषि और ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं को वित्त मंत्री द्वारा दिया गया प्रोत्साहन स्वागत योग्य कदम है।

बैंक कर्मचारी अविनाशचंद्र मिश्रा कहते हैं कि बजट में 10 लाख से ऊपर की सालाना आमदनी वाले को ही फायदा होगा। आयकर की छूट का दायरा और बढ़ाना चाहिए थे।

भारतीय प्रबंधन संस्थान(आईआईएम) लखनऊ के छात्र मनीश देव कहते हैं कि बजट में आम आदमी का ख्याल रखा गया है। वित्त मंत्री ने अपने बजट में इंडिया से ज्यादा भारत पर ध्यान दिया है। बजट में ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के बहुत कुछ किया गया है। कृषि और किसान का हमारे देश के विकास में अहम योगदान है। वित्त मंत्री ने इन्हें उपेक्षति नहीं किया।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के बजट से भले ही किसानों के चेहरे खिल गये होंे, लेकिन उद्योग जगत इस बजट से उपेक्षित महसूस कर रहा है।

एलएमएल मोटर्स के उपाध्यक्ष आर.के.श्रीवास्तव ने इस बजट से इंडस्ट्री को कोई फायदा नहीं होगा। मंदी के इस दौर मे हमें वित्त मंत्री से बड़ी आशाएं थीं कि वे इस सेक्टर की बेहतरी के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे, लेकिन हमें निराशा हाथ लगी है। क्योंकि यह उद्योगों के अनुरूप बजट नहीं है, ऐसे में उद्योग विकास नहीं कर पाएंगे।

उद्योगपति अमित गुप्ता कहते हैं कि लघु उद्योगों के लिए बजट में कुछ नहीं किया गया है। कई भी वित्त मंत्री लघु उद्योगों को गंभीरता से नहीं लेता है। उम्मीदों से नीचे उतरकर भी देखें तो इस बजट में हमारे लिए कुछ नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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