जरदारी के समक्ष दया याचिका पेश करेगा सरबजीत (लीड-1)

लाहौर की कड़ी सुरक्षा वाली कोट लखपत जेल में कैद सरबजीत से मुलाकात करने के बाद वकील ओवैस कुरैशी ने पत्रकारों से कहा, "मैं बुधवार को दया याचिका दायर करूंगा। मैंने राष्ट्रपति से मुलाकात करने का भी आग्रह किया है ताकि इस मामले को व्यक्तिगत रूप से उनके सामने रख सकूं।"

कुरैशी ने कहा कि दया याचिका में वर्ष 1990 में हुए बम विस्फोटों के दोष में मौत की सजा पाए सरबजीत का पत्र शामिल होगा, जिसमें जरदारी से मानवीय आधार पर क्षमा का आग्रह किया गया है, ताकि सरबजीत अपनी बाकी जिंदगी अपने परिवार के साथ भारत में बिता सके।

सरबजीत के पत्र में कहा गया है, "मैं पहले ही लगभग 19 साल कैद में गुजार चुका हूं। वैसे भी इस्लाम अपने अनुयायियों को बदला लेने के बदले क्षमा करने की शिक्षा देता है।"

कुरैशी के अनुसार सरबजीत ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी आग्रह किया है कि वह उसके मामले में पाकिस्तानी सरकार के साथ बात करें।

पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 24 जून को सरबजीत सिंह की मौत की सजा के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद अब इस मामले में दया याचिका दायर की जाएगी।

भारत ने उम्मीद जाहिर की है कि पाकिस्तान इस मामले में सहानुभूतिपूर्ण व मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगा।

विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने स्वीकार किया है कि सरबजीत के मामले ने देश में एक भावनात्मक रूप ले लिया है।

कृष्णा ने कहा है, "सरबजीत सिंह के मामले ने देश में तमाम लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया है।"

कृष्णा ने कहा है कि भारत ने सरबजीत सिंह को फांसी के फंदे से मुक्त कराने के लिए पाकिस्तान सरकार से पहले भी अपील की है और आगे भी लगातार अपील करता रहेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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