आम बजट: ग्रामीण भारत के लिए कई घोषणाएं, रक्षा बजट में वृद्धि(लीड-2)

नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। देश में गरीबी आधी करने और हर वर्ष 1.2 करोड़ लोगों को रोजगार मुहैया कराने के वादे के साथ सोमवार को लोकसभा में पेश आम बजट 2009-10 में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आयकर छूट की सीमा बढ़ाने और कल्याणकारी व आधारभूत योजनाओं के लिए आवंटन में वृद्धि करने का प्रस्ताव किया है।

रक्षा मद में 1,41,703 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जबकि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के लिए आवंटन में 39,100 करोड़ की वृद्धि की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए आवंटन में 2057 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है। ग्रामीण आवास योजना के लिए 20 हजार करोड़ और ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के लिए सात हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुखर्जी ने करीब 100 मिनट के भाषण में किसानों के लिए नए प्रोत्साहन, भारत निर्माण योजना में 45 फीसदी की वृद्धि, शहरी विकास पर ज्यादा खर्च, ऊर्जा सुरक्षा को प्रोत्साहन के साथ विनिवेश की गाड़ी आगे बढ़ाने की घोषणा की।

बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर छूट की सीमा में 15 हजार रुपये जबकि महिलाओं व अन्य के लिए इसमें 10 हजार रुपये की वृद्धि की गई है। आयकर पर 10 फीसदी के सरचार्ज को खत्म करने का ऐलान किया गया है।

वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव कर गरीब परिवारों को तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्रति माह 25 किलो चावल या गेहूं उपलब्ध कराने के साथ गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए नई स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने की घोषणा की।

उद्योग जगत को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने कमोडिटी ट्रांजेक्शन कर को खत्म करने की घोषण की। हालांकि कारपोरेट कर में कोई बदलाव नहीं किया गया है और न्यूनतम आल्टरनेट टैक्स को बुक प्रोफिट का 15 फीसदी करने का प्रस्ताव है। बुक प्रोफिट वह लाभ होता है जिसका उपयोग नहीं किया जाता है।

मुखर्जी ने कारपोरेट जगत को खुश करने के लिए फ्रिंज बेनिफिट टैक्स को खत्म करने के अलावा पूरे भारत में एक अप्रैल से एक समान वस्तु एवं सेवा कर लगाने और राजनीतिक चंदे पर कर में 100 फीसदी की छूट देने की घोषणा की।

सफेद रंग के बंद गले का सूट पहले 73 वर्षीय मुखर्जी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार एक ऐसे एजेंडे पर चल रही है जिससे कि प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ लोगों को रोजगार और वर्ष 2014 तक देश में गरीबी आधी की जा सकेगी।

उन्होंने वैश्विक वित्तीय संकट के कारण आर्थिक विकास की दर में आई गिरावट के संदर्भ में कहा, "सरकार चुनौतियों को स्वीकार करती है।" वित्तीय संकट के कारण देश की विकास दर और नौ फीसदी से गिरकर बीते वित्त वर्ष में 6.7 फीसदी हो गई थी। उन्होंने कहा, "पहली चुनौती सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास की दर को नौ फीसदी पर लाना है।"

बजट पेश करने के बाद एक टीवी चैनल से बातचीत में मुखर्जी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था में सुधार तब तक मुश्किल है जब तक कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव न दिखे।

उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की उम्मीद है लेकिन यदि पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में सुधार नहीं आता है तो इसमें और लंबा समय लग सकता है।

चालू वित्त वर्ष में बजट घाटा बढ़कर 6.8 फीसदी होने के अनुमान से जुड़े सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि घाटे की स्थिति अमेरिका और ब्रिटेन की तुलना में काफी बेहतर है।

उन्होंने कहा, "मैं सोंचता हूं कि इस साल अमेरिका में वित्तीय घाटा 11 और ब्रिटेन में 16 फीसदी से अधिक है। इसकी तुलना में 6.8 फीसदी काफी बेहतर है।"

मुखर्जी ने कहा कि उनका लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में छह फीसदी विकास दर हासिल करने के साथ आने वाले वर्ष में अर्थव्यवस्था की रफ्तार आठ फीसदी करना है।

उधर, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों मेंविनिवेश के लिए प्रतिबद्ध है और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बजट भाषण में इस प्रतिबद्धता को जाहिर किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का सार्वजनिक स्वरूप बनाए रखते हुए वित्त मंत्री ने विनिवेश में तेजी लाने की सरकार की प्रतिबद्धता को जाहिर किया है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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