बजट समूचे देश के लिए निराशाजनक : भाजपा
भाजपा संसदीय दल की प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "आर्थिक सर्वेक्षण में आर्थिक सुधारों की जो झलकियां दिखी थी वह बजट में नदारद है। ऐसा लगता है कि सरकार के अंदर के जिन आर्थिक विशेषज्ञों ने सर्वेक्षण में जो सुझाव दिए थे वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) को स्वीकार्य नहीं लगे।"
उन्होंने कहा, "देश को उम्मीद थी कि ऐसा बजट पेश किया जाएगा जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, निर्यात में हो रही कमी दूर की जाएगी, करों से लोगों को राहत मिलेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह बजट समूचे राष्ट्र को निराश करने वाला है।"
सुषमा ने कहा कि बजट में जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं वह परेशान करने वाले हैं। उन्होंने कहा, "बजट में स्वीकार किया गया है कि वित्तीय घाटा 2.7 फीसदी से 6.8 फीसदी हो गया है। यह आंकड़ा परेशान करने वाला है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का राजस्व घाटा 4.8 फीसदी पर पहुंच जाना और अधिक चिंता की बात है।"
उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में प्रति वर्ष एक करोड़ अधिक रोजगार सृजन का वादा किया था लेकिन अपने पांच वर्षो के कार्यकाल में पांच करोड़ रोजगार सृजन करने में वह असफल रही। इसके विपरीत रोजगार के अवसरों में कमी आई है। आर्थिक सर्वेक्षण में इसे बहुत हद तक स्वीकार भी किया गया है। इस बजट में भी वित्त मंत्री ने प्रति वर्ष 1.2 करोड़ रोजगार सृजन करने की बात की है।
सुषमा ने कहा कि पिछले सत्र में राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल के अभिभाषण में विनिवेश पर फिर से जोर देने का झूठा आश्वासन दिया गया था। देश में विनिवेश नदारद है। ऐसा दिख नहीं रहा है कि कोई महत्वूपर्ण विनिवेश हो भी सकता है।
उन्होंने हालांकि सुरक्षा बलों के लिए वन रैंक वन पेंशन की योजना को लागू करने, फ्रिंज बेनिफिट टैक्स और कॉमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स समाप्त करने के सरकार के फैसले को स्वागत योग्य बताया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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