'जल्दबाजी में तैयार हुआ रेल बजट'

रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष का कहना है कि रेल बजट में कोई नई बात नहीं है और ये पारंपरिक बजट है. इसे जल्दबाजी में तैयार किया गया लगता है.
ममता बनर्जी तत्काल सेवा को समाप्त करने की बात कर रहीं थीं लेकिन उन्होंने केवल इसका शुल्क 150 से घटाकर 100 रुपए कर दिया है और इसकी अवधि पाँच दिन से घटाकर दो दिन कर दी है. नॉन स्टॉप ट्रेन सुनने में तो बहुत अच्छी बात लगती है लेकिन इन ट्रेनों को तकनीकी कारणों से रोकना पड़ेगा.
राजधानी ट्रेनों की जब शुरुआत की गई थी तो उनके पीछे भी यही सोच था लेकिन वो भी कई स्थानों पर रुकती थीं. अब एर्नाकुलम से नई दिल्ली नॉन स्टॉप ट्रेन का क्या औचित्य है.
जहाँ तक लालू यादव और ममता बनर्जी के रेल बजटों की तुलना का सवाल है तो ममताजी ने पारंपरिक बजट पेश किया है और पुरानी बातों को ही आगे बढ़ाया है.
जहाँ तक यात्री सुविधाओं का सवाल है, तो उसके बारे में हमेशा बात होती है लेकिन इस बार उन्होंने कुछ स्टेशनों को प्राथमिकता देने की बात की है. एक बात को लेकर मुझे खुशी है कि ममता बनर्जी ने रेलवे की टिकट बेचने की क्षमता में कमी की बात को स्वीकारा है.
वो डाकघरों से टिकट बेचने की शुरुआत कर रही हैं. इससे लोगों को टिकट के लिए लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ेगा और रेलवे की कमाई भी बढ़ेगी.
(आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित)


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